Sunday, July 26, 2026 |
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Iran-US तनाव के बीच तेल कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजार पर असर

by Business Remedies
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Barrels of crude oil and rising prices in the global market

Mumbai,

वैश्विक तेल कीमतों में गुरुवार को तेज उछाल देखने को मिला, जब ईरान ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध समाप्त करने को लेकर अमेरिका के साथ सीधे वार्ता में शामिल नहीं है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए। ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1.21 प्रतिशत बढ़कर 103.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल 1.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 91.54 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने कीमतों को ऊपर धकेला है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थों के जरिए हो रही बातचीत को सीधे वार्ता नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही संकेत दिए गए कि ईरान अमेरिका समर्थित युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर सकता है। इससे पहले बुधवार को पश्चिम एशिया में युद्धविराम की उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी। हालांकि, ताजा घटनाक्रम ने बाजार की दिशा बदल दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से चालू खाता घाटा (CAD) सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 0.3 से 0.5 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है। साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पर भी 20 से 30 आधार अंक तक असर पड़ता है। हालांकि, कीमतों में पहले आई गिरावट से महंगाई और चालू खाता घाटा जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों को कुछ राहत मिलने की संभावना बनी थी, लेकिन ताजा तेजी ने चिंता बढ़ा दी है।

इसी बीच, ईरान ने घोषणा की है कि वह पांच “मित्र” देशों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इनमें भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक शामिल हैं। इन देशों के जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई है। वहीं, अमेरिका, इज़राइल और कुछ खाड़ी देशों से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने साफ किया है कि जो देश वर्तमान संघर्ष में शामिल हैं या विरोधी माने जाते हैं, उनके जहाजों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ stock market update पर भी देखने को मिल सकता है, जहां निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक स्थिति पर बनी हुई है।



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