बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। डिजिटल ट्विन मॉडलिंग और रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स से खनन कार्यों को अधिक सुरक्षित, दक्ष और पारदर्शी बनाने पर विशेषज्ञों ने जोर दिया और नई जानकारियां दीं। मौका था जयपुर के होटल क्लाक्र्स आमेर में हुई तीन दिवसीय इंटरनेशनल माइनिंग सेमिनार का, जिसमें अंतिम दिन राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने खनन क्षेत्र को ‘विजन-2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला क्षेत्र बताते हुए नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
वहीं दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. पुखराज नैनीवाल ने की, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ. पी. सी. बकलीवाल ने की। दोनों सत्रों में खनन क्षेत्र से जुड़े समसामयिक व रणनीतिक विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। वहीं अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता भी मौजूद रहे। गौ-आधारित जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास के समर्थक गुप्ता ने राजस्थान को “पूर्ण जैविक प्रदेश” बनाने के लिए राज्य सरकार से ठोस नीतिगत पहल और “राजस्थान जैविक प्रदेश मिशन” लागू करने का आग्रह किया।
खदान सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल: सत्रों में भूमिगत खनन में विकास कार्यों के अनुकूलन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और लागत नियंत्रण की नई पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक अनुभव बताए। बेंच स्थिरता और ढाल प्रबंधन जैसे विषयों पर तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए खदान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई। साथ ही सामरिक व महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, उनकी उत्पत्ति और वितरण व ऊर्जा संक्रमण के संदर्भ में उनकी भूमिका पर विचार हुआ।
वक्ताओं ने भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, आधुनिक उद्योगों की मांग और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिक अन्वेषण, भू-रासायनिक अध्ययन और नई खोज रणनीतियों को आवश्यक बताया। खनन सुरक्षा में भूविज्ञान की भूमिका को बताते हुए रेखांकित किया कि तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बिना सुरक्षित व खनन संभव नहीं है।
विकास के समन्वय से ही भविष्य का खनन उत्तरदायी बनेगा: डॉ. मनोज कुमार गौड़ ने समापन संश्लेषण में संगोष्ठी के तीनों दिनों की चर्चाओं को समेटते हुए कहा कि आयोजन खनन क्षेत्र के तकनीकी, नीतिगत और पर्यावरणीय रूपांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। डिजिटल नवाचार, पारदर्शी शासन और विकास के समन्वय से ही भविष्य का खनन अधिक सुरक्षित और उत्तरदायी बन सकेगा।
एम. ई. ए. आई. जयपुर चैप्टर चेयरमैन ललित मोहन सोनी ने कहा कि भारत की खनिज संपदा देश की आर्थिक प्रगति का आधार बन सकती है, यदि इसे आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नीति-समर्थन के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। युवाओं को खनन व भूविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना समय की मांग है।

