Business Remedies / New Delhi (IANS) भारत में औद्योगिक उत्पादन दिसंबर में दो वर्षों से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस तेज़ी का मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन रहा। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में Index of Industrial Production (IIP) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 6.7 प्रतिशत थी।
इसका अर्थ है कि देश की फैक्ट्रियों, खदानों और बिजली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में औद्योगिक गतिविधियां काफी मजबूत रहीं और साल-दर-साल आधार पर आईआईपी में 7.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले दो वर्षों से अधिक समय में सबसे तेज वृद्धि है।
नवंबर के आंकड़ों को संशोधित करने के बाद उस महीने की आईआईपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न सेक्टरों में उत्पादन में निरंतर सुधार देखा गया है। दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली—तीनों सेक्टरों ने मजबूत प्रदर्शन किया।
दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 8.1 प्रतिशत, माइनिंग सेक्टर 6.8 प्रतिशत और बिजली उत्पादन 6.3 प्रतिशत बढ़ा। यह संकेत देता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता मांग में मजबूती बनी हुई है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 16 उद्योग समूहों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन 34.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मोटर व्हीकल्स, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का उत्पादन 33.5 प्रतिशत और अन्य परिवहन उपकरणों का उत्पादन 25.1 प्रतिशत बढ़ा।
इसके अलावा, बेसिक मेटल्स का उत्पादन 12.7 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें एलॉय स्टील, एमएस स्लैब और स्टील पाइप एवं ट्यूब्स का अहम योगदान रहा। फार्मास्युटिकल उद्योग में भी 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जहां वैक्सीन, पाचन से जुड़ी दवाइयों और विटामिन उत्पादों की मांग मजबूत रही।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स का उत्पादन दिसंबर में 12.1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 12.3 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेश गतिविधियों के साथ-साथ उपभोक्ता खर्च भी मजबूत बना हुआ है।
इस दौरान कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.1 प्रतिशत, इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 7.5 प्रतिशत और प्राइमरी गुड्स का उत्पादन 4.4 प्रतिशत बढ़ा।
वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर की अवधि के दौरान कुल औद्योगिक उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि वित्त वर्ष की शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन साल के अंत तक औद्योगिक ग्रोथ की दिशा स्पष्ट रूप से मजबूत नजर आई।
CARE Ratings की Chief Economist Rajni Sinha के अनुसार, दिसंबर में 7.8 प्रतिशत की औद्योगिक वृद्धि दो वर्षों से अधिक समय में सबसे तेज है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली—तीनों सेक्टरों में अच्छी बढ़त देखी गई है।
उनके मुताबिक, सरकार के लगातार कैपेक्स खर्च के चलते इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े उत्पादों में मजबूती बनी हुई है, जबकि उपभोक्ता मांग भी सहायक रही है। जीएसटी सुधार, इनकम टैक्स में राहत, आरबीआई की पिछली ब्याज दर कटौती और महंगाई में नरमी जैसे कारक आगे भी खपत को समर्थन देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला केंद्रीय बजट देश की आर्थिक रफ्तार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार की कैपेक्स नीतियां और उनका निजी निवेश पर प्रभाव औद्योगिक प्रदर्शन को प्रभावित करेगा, जबकि अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक जोखिमों पर भी सतर्क नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

