बिजऩेस रेमेडीज/मुंबई
भारत के प्रमुख स्कूल एडटेक लीड ग्रुप ने एक नया अध्ययन जारी किया है। इस अध्ययन का नाम ‘द पल्स ऑफ स्कूल लीडर्स सर्वे’ है और यह भारत में स्कूली शिक्षा की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करता है। इसके महत्वपूर्ण नतीजों में से एक यह है कि जो स्कूल अपने विद्यार्थियों को मल्टी-मोडल (बहुविधि) तरीके से पढ़ाते हैं, उन्होंने खुद को उन स्कूलों की तुलना में उच्च रेटिंग दी है, जिनके पास पढ़ाई के लिए किताबों जैसे पारंपरिक तरीके ही मौजूद हैं।
देशभर में हुए इस सर्वे का आधार लगभग 1.7 लाख विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व कर रहे 500 से अधिक निजी स्कूलों की रेटिंग था। स्कूलों से खुद को विद्यार्थियों की शिक्षा के चार महत्वपूर्ण नतीजों – – कॉन्सेप्ट की समझ, आत्मविश्वास, अंग्रेजी बोलना और पढ़ाई की संपूर्ण गुणवत्ता पर रेटिंग प्रदान करने के लिये कहा गया था। ज्यादातर स्कूलों ने खुद को कॉन्सेप्ट की समझ और संपूर्ण गुणवत्ता के मामले में उच्च रेटिंग दी, जबकि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास के स्तर और अंग्रेजी बोलने के कौशल में काफी अंतर देखने को मिला।
यह सर्वे उन स्कूलों के प्रदर्शन में स्पष्ट अंतर दिखाता है, जो लीड जैसे इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल करते हैं, बनाम उनके, जो किताबों जैसे पारंपरिक तरीकों पर ही भरोसा करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि इंटीग्रेटेड सिस्टम्स में तरह-तरह के तरीके होते हैं, जैसे कि किताबें, वीडियो और गतिविधियाँ। यह तरीके उनके लेसन प्लांस में काम आते हैं। नेशनल कुरिकलम फ्रेमवर्क 2023 भी इन विभिन्न तरीकों की अनुशंसा करता है, जिनमें जोर दिया जाता है कि शिक्षा पारंपरिक किताबों से बढक़र होनी चाहिये।
मुख्य विषयों के कॉन्सेप्ट की समझ: इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल करने वाले 93 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों का मानना है कि उनके विद्यार्थी गणित और विज्ञान के कॉन्सेप्ट को समझने में बेहतरीन हैं, जबकि अन्य स्कूल 85 प्रतिशत ही ऐसे हैं।
आत्मविश्वास का स्तर: इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल कर रहे 87 प्रतिशत स्कूलों ने अपने विद्यार्थियों का आत्मविश्वास अच्छा बताया, जबकि ऐसे अन्य स्कूल 78 प्रतिशत ही हैं।
अंग्रेजी में निपुणता : इंटीग्रेटेड सिस्टम्स के जरिये मल्टी-मोडल शिक्षा देने वाले 79 प्रतिशत स्कूलों ने बताया कि उनके विद्यार्थी अंग्रेजी बोलने में सहज महसूस करते हैं, जबकि अन्य स्कूलों में यह आंकड़ा 73 प्रतिशत था।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : ज्यादातर स्कूलों ने अपनी शिक्षा की गुणवत्ता को अच्छी रेटिंग दी। हालांकि इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल करने वाले तीन में से एक स्कूल ने अपनी गुणवत्ता को उच्च रेटिंग दी, लेकिन अन्य चार में से केवल एक स्कूल ने खुद को ऊँचा रेट किया।
लीड गु्रप के ‘द पल्स ऑफ स्कूल लीडर्स सर्वे’ के मुताबिक, इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का इस्तेमाल कर रहे प्रिंसिपल्स और स्कूल मालिकों ने विद्यार्थियों में आए बदलाव का श्रेय मल्टीमोडल शिक्षा को दिया। इसमें स्मार्ट कक्षा और एक्टिविटी किट्स (48 प्रतिशत स्कूल लीडर्स), शिक्षकों पर केन्द्रित प्रशिक्षण (33 प्रतिशत स्कूल लीडर्स) और पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण नवाचार, जैसे कि ईएलजीए (लीड का अनोखा प्रोग्राम जो अंग्रेजी एक कुशलता के तौर पर सिखाता है) और कोडिंग (29 प्रतिशत स्कूल लीडर्स) शामिल हैं। सर्वे में स्कूलों की आकांक्षाओं और चुनौतियों के बारे में भी जानकारी मिली। स्कूल चाहते हैं कि उन्हें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिये पहचान मिले और उनकी दूसरी आकांक्षा है तकनीक का जानकार बनना। इससे टेक्नोलॉजी के महत्व का पता साफतौर पर चलता है। स्कूलों की दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी और विद्यार्थियों में सीखने का कौशल कम होना। इससे पता चलता है कि आम धारणा के विपरीत, ज्यादातर निजी स्कूल किफायती हैं और निम्न तथा मध्यम आमदनी वाले परिवारों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।
इस सर्वे के बारे में लीड ग्रुप के सीईओ एवं को-फाउंडर सुमीत मेहता ने कहा कि स्कूल हमारे भविष्य का आधार हैं। उनकी आकांक्षाओं, चुनौतियों, उनके लिये काम करने योग्य चीजों और बदलाव की जरूरतों को समझना महत्वपूर्ण है। हम मल्टी-मोडल शिक्षा और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भरोसा करते हैं, इससे शिक्षकों को सशक्त बनाने में मदद मिलती है। और सर्वे के यह नतीजे हमारे इस विश्वास को और भी मजबूत करते हैं।’’
मेहता ने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य देश के हर बच्चे के लिये विश्व-स्तरीय शिक्षा को सुलभ बनाना है। हम उन्हें 21वीं सदी में उत्कृष्टता पाने के लिये जरूरी कौशल एवं ज्ञान से लैस करना चाहते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पिछले महीने चार साल पूरे हो चुके हैं। यह एक मजबूत फ्रेमवर्क प्रदान करती है, जिससे भारत सभी के लिये अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का अपना सपना साकार कर सकता है।’’

