नई दिल्ली,
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को झारखंड में ग्रामीण शासन व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए 275 करोड़ 12 लाख 53 हजार रुपये से अधिक की राशि जारी करने की घोषणा की। यह राशि वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत पंचायत राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत करने के उद्देश्य से दी गई है। पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, यह धनराशि वित्त वर्ष 2024–25 की अनटाइड अनुदान की दूसरी किस्त से संबंधित है। इससे राज्य की सभी पात्र 24 जिला पंचायतों, 253 प्रखंड पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा। मंत्रालय ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत राज्यों को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुदान दो किस्तों में जारी किया जाता है।
मंत्रालय के मुताबिक, अनटाइड अनुदान का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जाएगा, लेकिन इसे वेतन और अन्य स्थापना व्यय पर खर्च नहीं किया जा सकेगा। वहीं टाइड अनुदान का उपयोग स्वच्छता सेवाओं को सुदृढ़ करने और खुले में शौच से मुक्त स्थिति को बनाए रखने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी यह राशि खर्च की जा सकेगी। इससे पहले इसी महीने केंद्र सरकार ने गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने के लिए 137 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करने की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लिए 3,324 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दूसरी किस्त के रूप में जारी की गई।
बिहार को 802 करोड़ 40 लाख रुपये प्रदान किए गए, जिससे राज्य की सभी 38 जिला पंचायतों, 533 प्रखंड पंचायतों और 8,053 ग्राम पंचायतों को लाभ मिला। साथ ही पहली किस्त की रोकी गई राशि में से 1 करोड़ 39 लाख रुपये भी पात्रता पूरी होने पर जारी किए गए। उत्तर प्रदेश को 1,559 करोड़ 40 लाख रुपये दिए गए, जिससे 75 जिला पंचायतों, 826 प्रखंड पंचायतों और 57,694 ग्राम पंचायतों को लाभ मिला। इसके अतिरिक्त 11 करोड़ 1 लाख 60 हजार रुपये की रोकी गई राशि भी जारी की गई।पश्चिम बंगाल को भी इसी किस्त के तहत 680 करोड़ 86 लाख रुपये आवंटित किए गए, जिससे 21 जिला पंचायतों, 335 प्रखंड पंचायतों और 3,225 ग्राम पंचायतों को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार का कहना है कि इन अनुदानों से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास तेज होगा और स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

