Wednesday, July 8, 2026 |
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भारत में पूंजीगत व्यय में उछाल, राज्य स्तर पर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में तेजी की उम्मीद : Jefferies

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/मुंबई(आईएएनएस)। वैश्विक ब्रोकरेज जेफरीज की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार भारत में पूंजीगत व्यय में शानदार वृद्धि हुई है और आने वाले महीनों में भी वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि कई क्षेत्रों में मजबूत निवेश देखने को मिल रहा है। जेफरीज के शोध प्रमुख और प्रबंध निदेशक महेश नंदुरकर को उम्मीद है कि फरवरी और मार्च में पूंजीगत व्यय में वृद्धि मजबूत रहेगी।

यह सरकार के संशोधित बजट अनुमानों के अनुरूप है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल विकास के लिए निरंतर प्रयास का संकेत देता है। नंदुरकर ने कहा, “ये अपेक्षित स्तर पर है, लेकिन यह तथ्य कि यह हो रहा है आत्मविश्वास को बनाए रखता है।” उन्होंने कहा कि अगर राजस्व में कमी आती है तो अगले वर्ष के आंकड़े, लगभग 10 प्रतिशत या उससे कम हो सकते हैं। नंदुरकर ने कहा, “बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार पूंजीगत व्यय को आगे बढ़ाती है या नहीं और क्या यह जारी रहता है।” जनवरी 2025 में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के कमिटमेंट को दर्शाता है। रेलवे और सडक़ परियोजनाओं पर सरकार के फोकस ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल करने में मदद की है, इन क्षेत्रों के लिए वित्त वर्ष 2025 के संशोधित अनुमानों का लगभग 83-87 प्रतिशत पहले ही पूरा हो चुका है। नंदुरकर ने कहा कि हमें अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। निजी पूंजीगत व्यय को लेकर बाजार सतर्क है। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सीमेंट, स्टील, अस्पताल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निजी पूंजीगत व्यय पहले से ही हो रहा है।” पूंजीगत व्यय के प्रति सरकार का कमिटमेंट मजबूत बना हुआ है, राज्यों को हस्तांतरण में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस वित्तीय सहायता से राज्य स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में और तेजी आने की उम्मीद है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। जेफरीज ने प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत विकास क्षमता पर भी प्रकाश डाला। उनमें से एक मेटल स्टॉक था। ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि एशियाई स्टील स्प्रेड अपने दीर्घकालिक औसत से 20 प्रतिशत नीचे बना हुआ है, जिससे संभावित विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है। इसके अलावा, भारतीय स्टील की कीमतें दिसंबर के निचले स्तर से 5 प्रतिशत बढ़ी हैं, जो इस क्षेत्र में सुधार का संकेत है। जेफरीज ने आगे कहा कि स्टील पर कोई भी संभावित सुरक्षा शुल्क कीमतों को एडिशनल सपोर्ट प्रदान कर सकता है, मार्जिन में सुधार कर सकता है और मेटल कंपनियों के लिए मूल्यांकन बढ़ा सकता है।



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