भारत निरंतर निर्यात के क्षेत्र में आगे कदम बढ़ाते जा रहा है। शीर्ष 10 प्रमुख निर्यात गंतव्यों में अप्रैल-जून की तिमाही में निर्यात 16.5 प्रतिशत की अच्छी दर से बढ़ा है, जो देशवासियों के लिए खुश खबर है। जबकि इस दौरान भारत का कुल वस्तु निर्यात 5.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। इस दौरान भारत के लिए शीर्ष 10 निर्यात केंद्रों में केवल चीन को निर्यात में 2.8 प्रतिशत की गिरावट आई। पर इनमें से शेष 9 देशों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, सऊदी अरब, बांग्लादेश, जर्मनी और मलेशिया में अच्छी धनात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन शीर्ष 10 देशों की भारत के कुल वस्तु निर्यात में हिस्सेदारी 52 प्रतिशत थी। भारत के लिए निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र अमेरिका बना हुआ है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और नीदरलैंड हैं। वित्त वर्ष,2023-24 में तीन प्रतिशत की गिरावट के बाद भारत के निर्यात में मौजूदा वर्ष में लगातार तीन महीनों में धनात्मक वृद्धि नजर आई। हालांकि यह वृद्धि एकसमान नहीं थी। इस वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल में 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि मई में निर्यात में 13 प्रतिशत का जबरदस्त इजाफा हुआ। हालांकि इसमें जून के दौरान महज 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका कारण यह था कि मांग सुस्त होने और लॉजिस्टिक्स संबंधी चिंताओं के कारण निर्यातकों को दिक्कतोंका सामना करना पड़ा था।जबकि आयात के मामले में भारत के शीर्ष 10 देशों में सिंगापुर, सऊदी अरब और स्विट्जरलैंड को छोडक़र अन्य से आयात में वृद्धि हुई। इन 10 देशों की भारत के कुल वस्तु आयात में हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक थी। इन 10 देशों से आयात 12 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कुल आयात में 7.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ। विदेशों से इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, अलौह धातुएं और मशीनरी अधिक मंगाए जाने के कारण आयात में इजाफा हुआ। भारत सबसे ज्यादा आयात चीन से करता है और उसके बाद रूस है। स्विट्जरलैंड से प्रमुख तौर पर सोने का आयात होता है और वहां से आयात 10.5 प्रतिशत गिरकर 4.56 अरब डॉलर हो गया है।

