Wednesday, March 11, 2026 |
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GDP data, अमेरिकी रोजगार आंकड़े और Venezuela में तनाव जैसी वैश्विक घटनाएं तय करेंगी भारतीय शेयर बाजार की दिशा

by Business Remedies
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Business Remedies/मुंबई (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार ने नए साल 2026 की शुरुआत अच्छी तेजी के साथ की और पिछले लगातार तीन कारोबारी सत्रों में तेजी देखने को मिली। बीते शुक्रवार को घरेलू बाजार बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। इस दौरान National Stock Exchange यानी NSE Nifty ने 26,340 का नया all-time high बनाया। वहीं कारोबार के अंत में Nifty 182 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,328.55 पर और BSE Sensex 573.41 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की उछाल के साथ 85,762.01 पर बंद हुआ।

बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में हलचल बनी रह सकती है। निवेशक देश के आर्थिक आंकड़ों और दुनिया भर में हो रही घटनाओं पर ध्यान देंगे। इन सब बातों से यह तय होगा कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे।कंपनियों के third quarter के नतीजों का सीजन आने वाला है। इसलिए निवेशकों की नजर कमाई के आंकड़ों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, प्रमुख मुद्राओं और सोने-चांदी की कीमतों पर रहेगी।

आने वाले हफ्ते में बाजार की चाल पर अपनी राय देते हुए एक market expert ने कहा कि Nifty के लिए ऊपर की ओर 26,400 पहला बड़ा स्तर है जो immediate resistance का काम करेगा। इसके बाद 26,500 और 26,600 का स्तर आ सकता है। वहीं नीचे की ओर 26,200 और 26,100 पर support मिल सकता है। अगर Nifty 26,000 से नीचे चला गया, तो बाजार और गिर सकता है।

घरेलू मोर्चे पर, निवेशक HSBC Services PMI और Composite PMI के final आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इससे पता चलेगा कि services sector (जैसे bank, hotel, IT) में कामकाज की रफ्तार कैसी है। इसके अलावा India की GDP growth के आंकड़े, banks के loans और deposits की स्थिति और foreign exchange reserves पर भी ध्यान दिया जाएगा। इनसे देश की आर्थिक हालत समझने में मदद मिलेगी। वैश्विक घटनाएं भी बाजार को प्रभावित करेंगी।

America द्वारा Venezuela में military action की खबरों से दुनिया के बाजारों में चिंता बढ़ी है। America के जरूरी economic data, जैसे वहां की jobs से जुड़े आंकड़े (Non-Farm Payroll) और unemployment rate भी काफी अहम हैं। इनसे यह अंदाजा लगेगा कि American Central Bank (Federal Reserve) interest rates पर क्या फैसला ले सकता है, जिसका असर India जैसे देशों पर भी पड़ता है।

Commodities यानी gold और silver की कीमतें हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी हैं। इसकी वजह दुनिया में बढ़ता तनाव और ज्यादा safe-haven investment की मांग है। जब gold और silver की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका मतलब होता है कि लोग risk से डर रहे हैं। इसके अलावा, US Dollar के मुकाबले Indian Rupee की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। ये सभी कारक बाजार की दिशा और दशा को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।



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