New Delhi,
भारत में पेशेवर मुख्य कार्यपालकों (सीईओ) के वेतन में वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इनका औसत वेतन लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर करीब 10.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि यह वृद्धि कोविड-19 महामारी के बाद की अवधि में सबसे धीमी मानी जा रही है। डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि वेतन वृद्धि की रफ्तार धीमी रहने का मुख्य कारण शेयर बाजार का कमजोर प्रदर्शन रहा। इससे शेयर आधारित वेतन का मूल्य घटा, जो शीर्ष प्रबंधन के कुल वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। पिछले 12 से 18 महीनों में निवेश पर कम रिटर्न के कारण कुल आय पर दबाव बना। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य कार्यपालकों के कुल वेतन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा शेयर आधारित प्रोत्साहन से जुड़ा होता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव उनकी आय पर पड़ता है।
अन्य शीर्ष अधिकारियों के वेतन में भी सीमित बढ़त
अन्य वरिष्ठ अधिकारियों (सीएक्सओ) के वेतन में 4 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेष रूप से मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के वेतन में सबसे अधिक बढ़त देखने को मिली। इसका कारण उच्च स्तर पर कर्मचारियों का पलायन, पूंजी के बेहतर उपयोग पर जोर और निदेशक मंडल स्तर की जिम्मेदारियों में वृद्धि बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सीएफओ का औसत वेतन करीब 4.5 करोड़ रुपये रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मुख्य डिजिटल अधिकारी की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है और इसे अब शीर्ष प्रबंधन स्तर की जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। भारत में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन मजबूत बना हुआ है और यह आंकड़ों पर आधारित होता है।
निर्णयों में परिपक्वता और दीर्घकालिक रणनीति पर जोर
डेलॉइट इंडिया के साझेदार आनंदोरूप घोष के अनुसार, भारत में शीर्ष अधिकारियों के वेतन निर्धारण में परिपक्वता देखने को मिल रही है। हाल के समय में वैश्विक तनावों के कारण बाजार में अस्थिरता और जोखिम बढ़े हैं, लेकिन कंपनियां जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बच रही हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियां घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तय करती हैं और दीर्घकालिक योजनाओं के अनुरूप वेतन संरचना में बदलाव करती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अब कंपनियां सभी कर्मचारियों के लिए एक समान योजना अपनाने के बजाय अलग-अलग समूहों के लिए विभिन्न दीर्घकालिक प्रोत्साहन योजनाएं लागू कर रही हैं। यह बदलाव भारत की कंपनियों में वेतन नीति के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।

