Sunday, June 28, 2026 |
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वैश्विक संकेतों के बीच सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, निवेशकों में चिंता

by Business Remedies
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Visualization showing falling gold and silver prices

New Delhi,

सोमवार को सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं रहीं। साथ ही, अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होने से भी कीमती धातुओं पर दबाव बना। Multi Commodity Exchange (MCX) पर 5 जून की डिलीवरी वाला सोना 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,46,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 1,47,255 रुपये पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई और यह करीब 3,043 रुपये या 2.06 प्रतिशत टूटकर 1,44,212 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह, 5 मई की डिलीवरी वाली चांदी भी दबाव में रही और इसमें 0.96 प्रतिशत की गिरावट आई। चांदी का भाव घटकर 2,25,763 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जबकि पिछले सत्र में यह 2,27,954 रुपये पर बंद हुई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में गिरावट देखी गई। ऊर्जा कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 1.61 प्रतिशत गिरकर 4,420.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी लगभग 3 प्रतिशत टूटकर 67.69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इसी तरह अन्य वैश्विक संकेतकों में भी गिरावट दर्ज की गई।

महीनेभर में भारी गिरावट

इस महीने अब तक सोने की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जो अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है, जो हाल के वैश्विक तनाव के चलते 2 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ है। वहीं, चांदी की कीमतें भी मार्च के उच्च स्तर से करीब 30 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव के बीच कभी-कभी सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बढ़ने के बावजूद सोने में कमजोरी बनी हुई है। आने वाले समय में कीमती धातुओं की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक संकेतों, ब्याज दरों के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।



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