Monday, February 16, 2026 |
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India-US व्यापार समझौता रोजगार बढ़ाएगा और विदेशी मुद्रा में इजाफा करेगा

by Business Remedies
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Ashishkumar Chauhan speaking about India-US trade deal and its impact on jobs and forex

नई दिल्ली,

NSE के प्रबंध निदेशक और CEO आशिषकुमार चौहान ने मंगलवार को कहा कि India-US व्यापार समझौता देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण डील है और यह नए रोजगार उत्पन्न करेगा तथा विदेशी मुद्रा (Forex) में भी इजाफा करेगा। चौहान ने IANS से बातचीत में कहा कि अमेरिका और भारत के बीच यह व्यापार समझौता लंबे समय से अपेक्षित था, और अब इसे तुरंत लागू किया जाएगा, जबकि यूरोपीय डील छह महीने बाद लागू होने की संभावना है।

रोजगार और निर्यात में वृद्धि की उम्मीद

चौहान ने कहा कि “India ही एक ऐसा देश है जहाँ मानव संसाधन, उच्च तकनीकी क्षमता और तकनीक को अपनाने की क्षमता मौजूद है। इसलिए सभी देश हमारे साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। इस डील के साथ India अधिक निर्यात करेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और Forex में इजाफा होगा।” उन्होंने बताया कि US ने भारतीय उत्पादों पर प्रत्याशित शुल्क (Reciprocal Tariff) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। चौहान ने कहा, “चमड़े के उत्पाद, वस्त्र, समुद्री उत्पाद — ये सभी रोजगार उत्पन्न करने वाले क्षेत्र हैं और अब अमेरिका को निर्यात में पुनर्जीवन मिलेगा। अगले 10 वर्षों में India के लिए स्वर्णिम युग होगा।”

निवेशकों और कंपनियों का उत्साह

चौहान ने कहा कि Portfolio Investors भी इस व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक हैं। “सब बहुत खुश हैं, विशेषकर निवेशक। इस डील के कारण कंपनियों के लाभ बढ़ने की संभावना बहुत अधिक है। भारतीय निवेशकों को प्रधानमंत्री की दृष्टि पर भरोसा है और इसी कारण हर महीने अधिक घरेलू निवेशक भारतीय कंपनियों का समर्थन कर रहे हैं। हाल के व्यापार समझौते उसी विश्वास का प्रत्यक्ष परिणाम हैं, जो दिखाते हैं कि भारतीय निवेशक अब अपनी वृद्धि का स्वयं वित्तपोषण करने में सक्षम हैं। चौहान ने बताया कि NSE का अपना अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज, जो Gift City में लगभग 22 घंटे चलता है, रात 2 बजे बंद होने पर 25,970 अंक पर था — लगभग 2.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ। उन्होंने कहा, “आज भी जब भारतीय बाजार खुले, NSE 2.5 प्रतिशत ऊपर खुला। मुझे लगता है कि यह प्रारंभिक प्रतिक्रिया है। जैसे ही कंपनियाँ अपने लाभ में वृद्धि का विश्लेषण करेंगी, उनका रेटिंग और बेहतर होगा।”

वैश्विक रणनीति और चीन के मुकाबले भारत की स्थिति

चौहान ने आगे कहा कि पिछले 30-35 वर्षों से US और कई यूरोपीय देश चीन का समर्थन कर रहे थे, लेकिन अब वे चीन को अपनी प्रतियोगिता मान रहे हैं और उससे दूरी बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “India को सही साझेदारों की आवश्यकता है, जो हमारे उत्पाद और सेवाओं, कौशल और विनिर्मित वस्तुएँ आयात कर सकें — जैसे US, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के देश। चीन हमारे उत्पाद आयात करने की संभावना कम है। इसलिए इन देशों के साथ बातचीत करके हम चीन के लिए प्रतियोगिता पैदा कर रहे हैं।”



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