बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (IANS) | राज्यसभा का 270वां सत्र प्रारंभ हो चुका है और इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी। यह संसद का बजट सत्र है। इस दौरान सदन में केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, अवकाश अवधि के दौरान विभाग-संबंधित parliamentary standing committees विभिन्न ministries और departments की अनुदान मांगों की विस्तार से समीक्षा करेंगी।
गुरुवार को उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति C.P. Radhakrishnan ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा के सभी सांसदों से सदन और committees दोनों में सार्थक एवं प्रभावी योगदान देने का आह्वान किया और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
सदन की अगली बैठक
1 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे होगी। इससे पहले, सभापति ने बताया कि बजटीय प्रस्तावों के साथ-साथ budget session में कई महत्वपूर्ण bills भी सदन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इन महत्वपूर्ण bills पर व्यापक discussion की अपेक्षा की गई है।
सभापति ने कहा कि legislative work की व्यापकता हमारी collective responsibility को रेखांकित करती है कि सदन के निर्धारित समय का अधिकतम और रचनात्मक उपयोग किया जाए। ऐसा करके जनता की aspirations को साकार किया जा सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी
उपराष्ट्रपति C.P. Radhakrishnan ने संसद के budget session के अंतर्गत राज्यसभा के 270वें सत्र में सभी सदस्यों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत विश्व की प्रमुख economies में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव के बीच संसद सदस्यों की responsibility और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि राष्ट्र की economic direction तय करने में संसद की भूमिका केंद्रीय है।
विधायी और parliamentary योगदान
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के संसद के दोनों सदनों को संबोधित भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें national priorities की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसके अनुरूप राज्यसभा भी अपने legislative और deliberative responsibilities के माध्यम से योगदान देगी।
राधाकृष्णन ने जानकारी दी कि इस सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें केंद्रीय बजट 2026-27 तथा सरकार के legislative proposals पर गहन चर्चा की जाएगी। उन्होंने सभी सांसदों से सशक्त parliamentary oversight सुनिश्चित करने और उच्चतम parliamentary decorum, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र विभिन्न विचारों और जीवंत बहस से सुदृढ़ होता है, किंतु मतभेदों की अभिव्यक्ति सम्मानजनक और रचनात्मक होनी चाहिए। यह सत्र शालीनता, अनुशासन और गरिमापूर्ण आचरण का उदाहरण बने, उन्होंने ऐसी अपेक्षा व्यक्त की।
महात्मा गांधी का उद्धरण
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि disciplined और enlightened लोकतंत्र संसार की सर्वोत्तम व्यवस्था है। सदन में सदस्यों का आचरण इसी अनुशासन और प्रबुद्धता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

