Sunday, June 28, 2026 |
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भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में जमीन सौदों में जबरदस्त उछाल, 2025 में 32 प्रतिशत वृद्धि

by Business Remedies
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View of land purchased for real estate projects in India

New Delhi,

भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान जमीन सौदों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डेवलपर्स ने कुल 3,093 एकड़ जमीन 149 सौदों के माध्यम से खरीदी, जिनकी कुल कीमत 54,818 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक है, जो क्षेत्र में मजबूत मांग और भरोसे को दर्शाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीदी गई जमीन पर अगले दो से पांच वर्षों में लगभग 229 मिलियन वर्ग फुट निर्माण की संभावना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि डेवलपर्स भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं और रियल एस्टेट में निवेश लगातार बढ़ रहा है।

बड़े शहरों में निवेश का दबदबा

निवेश के पैटर्न में असंतुलन भी सामने आया है। टियर-1 शहरों में कुल पूंजी का 89 प्रतिशत निवेश हुआ, जबकि इन शहरों में केवल 52 प्रतिशत जमीन की खरीद हुई। इसका मतलब है कि बड़े शहरों में जमीन महंगी होने के कारण अधिक पूंजी खर्च की जा रही है। वहीं, टियर-2 शहरों में 48 प्रतिशत जमीन के सौदे हुए, लेकिन यहां केवल 11 प्रतिशत निवेश आया। इससे संकेत मिलता है कि इन शहरों में जमीन सस्ती है और भविष्य में विकास की संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भी यह रफ्तार बनी हुई है। प्रमुख बाजारों में करीब 900 एकड़ जमीन खरीदी गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 18,000 करोड़ रुपये रही। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई महानगरीय क्षेत्र में सबसे बड़ा सौदा हुआ, जहां 11 एकड़ जमीन 5,400 करोड़ रुपये में खरीदी गई।

निर्माण के लिए भारी पूंजी की जरूरत

इन जमीन परियोजनाओं को विकसित करने के लिए 92,000 करोड़ रुपये से अधिक की निर्माण पूंजी की आवश्यकता होगी। इसमें से करीब 52,000 करोड़ रुपये बाहरी स्रोतों से जुटाए जाने की संभावना है। इससे वैकल्पिक निवेश कोष, निजी ऋण प्रदाता और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

आवासीय परियोजनाएं बनीं प्रमुख आधार

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आवासीय परियोजनाएं इस वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई हैं। कुल जमीन आवंटन में इनकी हिस्सेदारी 78 प्रतिशत रही, जबकि कुल फंडिंग आवश्यकता में लगभग 76 प्रतिशत योगदान रहा। इन परियोजनाओं की निर्माण लागत 72,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। दफ्तर निर्माण क्षेत्र में भी मांग बनी हुई है, जहां लगभग 8,700 करोड़ रुपये की पूंजी की आवश्यकता का अनुमान है, जो उच्च गुणवत्ता वाले कार्यालय स्थलों की मांग को दर्शाता है।

किसके पास रही जमीन की आपूर्ति

जमीन की आपूर्ति के मामले में व्यक्तिगत भू-स्वामियों का दबदबा रहा, जिन्होंने कुल सौदों में 65 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी। चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में व्यक्तिगत विक्रेताओं का प्रभाव रहा, जबकि हैदराबाद में कंपनियों ने प्रमुख भूमिका निभाई। दिल्ली-एनसीआर में अधिकांश सौदे सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए।औद्योगिक और उभरते क्षेत्रों में डेवलपर्स अब नए अवसर तलाश रहे हैं। डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और अन्य वैकल्पिक रियल एस्टेट क्षेत्रों में निवेश की रुचि तेजी से बढ़ रही है।



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