नई दिल्ली,
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यवस्था में मजबूत स्थान बनाने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों में अग्रणी बनना होगा। उन्होंने जोर दिया कि अब भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता बनकर नहीं रह सकता, बल्कि उसे निर्माता, डिज़ाइनर और नवाचार का वैश्विक चालक बनना होगा।
उन्होंने लॉस एंजेलिस में आयोजित पैन-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि यह बदलाव देश के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों की सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, भारत इस समय अपने विकास यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। डॉ. सिंह ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रभाव की आधारशिला बनेंगे। उन्होंने बताया कि भारत का विस्तारित अंतरिक्ष कार्यक्रम, जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज प्रगति और गहन तकनीक आधारित नवाचार कंपनियों का उभरना देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि भारत उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है। साथ ही उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेष रूप से आईआईटी से जुड़े पूर्व छात्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, ये लोग भारत और वैश्विक नवाचार तंत्र के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि निवेश, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से इन पूर्व छात्रों का योगदान भारत के विकास पथ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका को भी सराहा, जिनके पूर्व छात्र वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, अत्याधुनिक अनुसंधान को आगे बढ़ा रहे हैं और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब ध्यान अगले विकास चरण की पहचान और उसमें निवेश पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने अर्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। डॉ. सिंह ने कहा कि ये क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए निर्णायक साबित होंगे। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया और नए शैक्षणिक मॉडल तथा संस्थान निर्माण की दिशा में काम करने की बात कही।




