Sunday, June 28, 2026 |
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भारत की आर्थिक वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहे मुख्य आधार

by Business Remedies
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India Manufacturing Hubs And Industrial Corridor Development

New Delhi,

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को 3.7 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2047 तक 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक आधिकारिक तथ्य-पत्र के अनुसार, देश के सकल घरेलू उत्पाद में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी वर्तमान 16 से 17 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस दिशा में सरकार की रणनीति अब एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग हब के विकास पर केंद्रित हो गई है। ये हब ऐसे समेकित क्षेत्र हैं जहां भौतिक ढांचा, नियामकीय सहायता, साझा सुविधाएं और बेहतर संपर्क व्यवस्था उपलब्ध होती है। इनका उद्देश्य उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाना, लागत को कम करना और लंबे समय तक औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती देना है, जिससे भारत घरेलू और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में अपनी स्थिति मजबूत कर सके। सरकार की मैन्युफैक्चरिंग नीति में अब बुनियादी ढांचे पर आधारित विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि उद्योगों को स्थिरता, भरोसेमंद व्यवस्था और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा मिल सके। पहले जहां परियोजना स्तर पर काम होता था, अब पूरी व्यवस्था को ध्यान में रखकर योजना बनाई जा रही है। इससे बाधाएं कम हो रही हैं, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर हो रही है और परियोजनाएं समय पर पूरी हो पा रही हैं।

सरकारी पूंजीगत व्यय में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है। यह 2014–15 में ₹.2लाखकरोड़ से बढ़कर 2026–27 में ₹.12.2लाखकरोड़ तक पहुंच गया है, जिससे बुनियादी ढांचे के निर्माण को बड़ा बढ़ावा मिला है। वैश्विक निवेश के रुझान भी भारत के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग गंतव्य बन चुका है। साथ ही उत्पादन संरचना में भी बदलाव हो रहा है, जहां मध्यम और उच्च तकनीक आधारित गतिविधियों की हिस्सेदारी कुल मैन्युफैक्चरिंग मूल्य में 46.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो उन्नत औद्योगिक ढांचे की ओर संकेत करता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME क्षेत्र भी इस विकास का मजबूत आधार है। देश में 7.47करोड़ से अधिक उद्यम इस श्रेणी में आते हैं, जो कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4 प्रतिशत योगदान देते हैं। यह क्षेत्र रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभा रहा है। 2026–27 के केंद्रीय बजट में इस क्षेत्र को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। इसमें तीन केमिकल पार्क, सात PM MITRA पार्क, MSME क्लस्टर और ₹.10000करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल शामिल है।

इन मैन्युफैक्चरिंग हब को औद्योगिक कॉरिडोर से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स और संपर्क व्यवस्था मजबूत हो सके। ये कॉरिडोर अलग-अलग इकाइयों के बजाय एक व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। Delhi–Mumbai Industrial Corridor, Chennai–Bengaluru Industrial Corridor, Amritsar–Kolkata Industrial Corridor और Vizag Chennai Industrial Corridor जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये कॉरिडोर बेहतर संपर्क, माल परिवहन और समेकित योजना के जरिए बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास को संभव बना रहे हैं।



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