नई दिल्ली। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत आने वाले प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सामूहिक रूप से 915.17 मिलियन टन कार्गो का प्रबंधन किया है, जो कि 904 मिलियन टन के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा कि यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.06 प्रतिशत अधिक है, जो इस क्षेत्र की मजबूत रिकवरी, बेहतर दक्षता और निरंतर विकास को दर्शाता है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, Sarbananda Sonowal ने कहा, “हमारे प्रमुख बंदरगाहों द्वारा 915 मिलियन टन से अधिक का रिकॉर्ड कार्गो प्रबंधन, भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, हम भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विश्व स्तरीय बंदरगाह अवसंरचना का निर्माण कर रहे हैं। इसके साथ ही कुशलता में सुधार कर रहे हैं और निर्बाध लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित कर रहे हैं। यह उपलब्धि ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत भारत को एक वैश्विक नौवहन शक्ति के रूप में स्थापित करने के हमारे संकल्प को और सुदृढ़ करती है।”
मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह प्रदर्शन प्रमुख बंदरगाहों में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है, जिसमें Deendayal Port Authority 160.11 मीट्रिक टन के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरा है, इसके बाद Paradip Port Authority 156.45 मीट्रिक टन और Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPA) 102.01 मीट्रिक टन पर है। इसके अलावा, Visakhapatnam Port Authority, Mumbai Port Authority, Chennai Port Authority और New Mangalore Port Authority सहित अन्य प्रमुख बंदरगाहों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसने समग्र कार्गो माल ढुलाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विकास दर के संदर्भ में, Mormugao Port Authority ने 15.91 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, इसके बाद Kolkata Dock System 14.28 प्रतिशत और JNPA 10.74 प्रतिशत पर रहे, जो बेहतर दक्षता और कार्गो की बढ़ती मात्रा को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने कहा कि कार्गो प्रबंधन में यह निरंतर वृद्धि कई कारकों द्वारा संचालित रही है, जिनमें बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता में वृद्धि, सुदृढ़ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी तथा निर्बाध हिंटरलैंड लिंकेज (पश्चभूमि संपर्क), डिजिटल एवं स्मार्ट पोर्ट पहलों को अपनाना, और कोयला, कच्चे तेल, कंटेनर, उर्वरक एवं पी.ओ.एल. जैसी प्रमुख वस्तुओं के संचालन में वृद्धि शामिल है।
साथ ही, जहाजों के टर्नअराउंड समय में सुधार और बंदरगाहों पर व्यापार सुगमता ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय बंदरगाह-आधारित विकास, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थिरता पर केंद्रित एक व्यापक समुद्री रणनीति को आगे बढ़ाना जारी रखे हुए है।

