New Delhi,
देश के प्रमुख आठ शहरों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र की मांग जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान मजबूत बनी रही। इस अवधि में कुल 1.1 करोड़ वर्ग फुट क्षेत्र में लीजिंग दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। इस तिमाही में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र ने कुल मांग में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी भूमिका निभाई। इसके बाद चेन्नई का स्थान रहा, जहां 21 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई। इसके अलावा हैदराबाद और बेंगलुरु में भी लीजिंग गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। इन शहरों में उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक और वेयरहाउसिंग परिसरों की मांग वर्ष 2026 की पहली तिमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 2 से 3 गुना तक बढ़ी है, जो क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को दर्शाता है।
लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने बढ़ाई मांग
रिपोर्ट के अनुसार, तृतीय पक्ष लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने इस तिमाही में कुल मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लिया। इन कंपनियों की मांग में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1.8 गुना अधिक रही। इस वृद्धि के पीछे लॉजिस्टिक्स जरूरतों का विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है। ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियों ने भी इस अवधि में मजबूत लीजिंग गतिविधियां दर्ज कीं। इन दोनों क्षेत्रों की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत रही और प्रत्येक क्षेत्र में 15 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में लीजिंग हुई। इसके अलावा एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने भी अपनी उपस्थिति बढ़ाते हुए पिछले वर्ष की तुलना में 2 गुना से अधिक लीजिंग दर्ज की।
भविष्य को लेकर सतर्क दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए डेवलपर्स निकट भविष्य में नई आपूर्ति जोड़ने के मामले में सतर्क रुख अपना सकते हैं। भू-राजनीतिक संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जिनका असर इस क्षेत्र पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सरकार का निरंतर समर्थन इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इससे संभावित जोखिमों को संतुलित करने में मदद मिलेगी। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संकट को भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है, जिस पर आने वाली तिमाहियों में नजर बनाए रखने की आवश्यकता है।

