New Delhi,
भारत के घरों में जमा विशाल सोने का भंडार अब देश के कर्ज बाजार की दिशा बदल रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह सोना न केवल पारंपरिक बचत का माध्यम है, बल्कि अब तेजी से कर्ज लेने का प्रमुख साधन भी बनता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास कुल मिलाकर 34,000 टन से अधिक सोना मौजूद है। एक अन्य अनुमान के अनुसार इसकी कुल कीमत लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। इसमें से करीब 90 प्रतिशत सोना अभी भी निष्क्रिय पड़ा है, लेकिन अब इसका उपयोग कर्ज के लिए गिरवी रखने में तेजी से बढ़ रहा है। देश में गोल्ड लोन अब खुदरा कर्ज के क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाले विकल्पों में शामिल हो गया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब अन्य उपभोक्ता कर्ज, विशेष रूप से बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन, सख्त नियमों के कारण धीमे पड़ गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2023 के अंत में बिना गारंटी वाले कर्ज के नियम कड़े कर दिए थे, जिससे ऐसे कर्ज लेना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया। इसी वजह से लोग अब गोल्ड लोन की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान प्रक्रिया है। इसमें बहुत कम कागजी कार्यवाही होती है और कर्ज जल्दी मिल जाता है। यही कारण है कि छोटे और मध्यम वर्ग के लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं।
सोने की कीमतों में तेजी से बढ़ा आकर्षण
साल 2024 के बाद से सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। इससे लोगों को अपने आभूषणों के बदले ज्यादा राशि का कर्ज मिल रहा है, जिससे यह विकल्प और अधिक आकर्षक बन गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड लोन की राशि एक साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ गई है। यह जनवरी में बढ़कर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो एक साल पहले करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये थी। इस तेजी के साथ, गोल्ड लोन अब आवास और वाहन कर्ज के बाद सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन का वास्तविक बाजार इससे कहीं बड़ा है और इसका आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। इसका कारण यह है कि सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के आंकड़े पूरी तरह शामिल नहीं होते। ये गैर-बैंकिंग कंपनियां कुल गोल्ड लोन बाजार का लगभग आधा हिस्सा संभालती हैं।
वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि
गोल्ड लोन क्षेत्र की तेज वृद्धि ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान भी आकर्षित किया है। हाल ही में एक बड़ी निवेश कंपनी ने एक प्रमुख वित्तीय कंपनी में 41.7 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की योजना बनाई है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, जापान की एक बड़ी वित्तीय संस्था ने भी भारत की एक प्रमुख वित्त कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है और वह अपने गोल्ड लोन कारोबार का विस्तार कर रही है। इस तरह, भारत का पारंपरिक सोना अब आधुनिक वित्तीय प्रणाली में नई भूमिका निभा रहा है और आने वाले समय में यह कर्ज बाजार का एक मजबूत स्तंभ बन सकता है।

