भारत में बहुराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी, आईटीईएस और इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनियों के संचालन ने वित्त वर्ष 2020 के बाद से करीब17लाखनई नौकरियां जोड़ी हैं। इसके साथ ही देश के इस सेक्टर में कुल रोजगार बढ़कर लगभग42लाखहो गया है। बेंगलुरु स्थित कंसल्टेंसी फर्म ‘विज़मैटिक’ की रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी से होने वाला निर्यात वित्त वर्ष2026तक बढ़कर लगभग164अरबडॉलर पहुंच सकता है, जबकि वित्त वर्ष2025में यह आंकड़ा153अरबडॉलर रहने का अनुमान है। देश में तेजी से बढ़ रहे जीसीसी अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में व्यावसायिक ऑफिस लीजिंग का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी से ऑफिस डिजाइन, कार्यस्थल की योजना और आवासीय परियोजनाओं की मांग में भी बदलाव देखा जा रहा है। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और बेंगलुरु के कई ऑफिस कॉरिडोर में जीसीसी कंपनियों को पारंपरिक आउटसोर्सिंग कंपनियों की तुलना में अधिक स्थिर और लंबे समय तक रहने वाले किरायेदार माना जा रहा है।
भूमिका ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक उद्धव पोद्दार ने कहा कि जीसीसी सेक्टर के विस्तार के कारण फरीदाबाद जैसे नए शहर निवेशकों और कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। दिल्ली-मुंबई मोटरवे, एफएनजी कॉरिडोर और मेट्रो कनेक्टिविटी जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से पहुंच आसान हुई है, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियां और आईटी सेक्टर यहां तेजी से रुचि दिखा रहे हैं। ग्रुप108के प्रबंध निदेशक संचीत भूटानी ने कहा कि व्यावसायिक स्तर पर ऑफिस स्पेस की दीर्घकालिक मांग में इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जीसीसी से जुड़ी कंपनियां अब ऐसे संगठित क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही हैं, जहां ऑफिस, रिटेल और आवासीय सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीसीसी अब केवल सपोर्ट सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पाद स्वामित्व, डेटा एनालिटिक्स, अनुपालन और रणनीतिक तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इससे कंपनियों की भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है। रियलिस्टिक रियल्टर्स के क्षेत्रीय निदेशक मोहित बत्रा ने कहा कि कंपनियां अब केवल ऑफिस बिल्डिंग नहीं, बल्कि मजबूत कारोबारी वातावरण, भविष्य में विस्तार की क्षमता और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की तलाश कर रही हैं। इसका असर व्यावसायिक विकास के साथ-साथ आवासीय योजना, रिटेल इंटीग्रेशन और शहरों की आधारभूत संरचना पर भी दिखाई देगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बावजूद भारत के जीसीसी सेक्टर का भौतिक विस्तार उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से जारी है और आने वाले वर्षों में यह रोजगार तथा रियल एस्टेट बाजार दोनों के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।

