भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर 14वां दौर वार्ता अगले माह 6 से 10 अक्टूबर तक ब्रसेल्स में होगा। इस दौर का मकसद दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम कर संतुलित और परस्पर लाभकारी समझौता करना है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भले ही हर मुद्दे पर तुरंत सहमति न बने, लेकिन अंतिम समझौता “बेहद अच्छा” होगा। दोनों पक्ष के वार्ताकार वर्तमान में सक्रिय चर्चा कर रहे हैं ताकि बचे हुए मुद्दे हल किए जा सकें।
पिछला 13वां दौर 8 से 12 सितंबर तक भारत में हुआ था, जिसमें ईयू के उपाध्यक्ष मारोस सेफकोविक और कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हेन्सन ने गोयल से मुलाकात कर वार्ता की प्रगति का जायजा लिया।
एफटीए की चर्चा में ऑटोमोबाइल सेक्टर मुख्य फोकस में है। वर्तमान में भारत में वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक आयात शुल्क है। ईयू चाहता है कि इसके उद्योगों के लिए समान रियायतें हों, ताकि भारतीय बाजार में उनके निवेश और उत्पादों की पहुंच आसान हो सके। हाल ही में भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते में भी ऑटो कंपनियों को इसी तरह की रियायतें दी थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उच्च मूल्य वाले निवेश और तकनीकी साझेदारी बढ़ेगी, जिससे भारत में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। फॉक्सवैगन और मर्सिडीज-बेंज जैसी यूरोपीय कंपनियां पहले से ही भारत में उत्पादन कर रही हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि ब्रसेल्स में 14वें दौर की वार्ता निर्णायक साबित हो सकती है। अगर सफल होती है, तो भारत-ईयू एफटीए न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि विदेशी निवेश और ऑटो सेक्टर के विकास में भी मदद करेगा।

