New Delhi,
देश के निर्माण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाले समय में राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026-27 में इन कंपनियों की आय में 6 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है। पिछले दो वर्षों से इस क्षेत्र में सुस्ती बनी हुई थी, जिससे कंपनियों की कमाई पर असर पड़ा। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान निर्माण क्षेत्र की आय वृद्धि सीमित रहेगी और यह केवल 2 से 4 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। खासतौर पर सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियों पर दबाव अधिक देखने को मिलेगा। सड़क निर्माण कंपनियों के ऑर्डर बुक में कमी इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा नई परियोजनाओं के आवंटन में धीमापन देखने को मिला, जिससे कंपनियों की नई परियोजनाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके अलावा, जल जीवन मिशन से जुड़े निर्माण कार्यों में भी धीमी गति देखने को मिली, जिसने इस क्षेत्र की कुल वृद्धि को प्रभावित किया।
विविध क्षेत्र वाली कंपनियों को मिलेगा लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, केवल सड़क क्षेत्र पर निर्भर कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि उनकी लाभप्रदता और आय की स्पष्टता कम हो रही है। वहीं, जिन कंपनियों का काम बिजली, शहरी बुनियादी ढांचा और जल आपूर्ति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है, उन्हें निवेश बढ़ने का लाभ मिल सकता है। रेटिंग एजेंसी ने निर्माण क्षेत्र के लिए अपना दृष्टिकोण स्थिर बनाए रखा है। इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण कार्य करने वाली कंपनियां, जो शहरी ढांचा, खनन, बिजली और सिंचाई क्षेत्रों में सक्रिय हैं, उनकी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। इन कंपनियों की आय में वर्ष 2026-27 में 8 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
ऑर्डर में बढ़ोतरी से सुधार की उम्मीद
वर्ष 2025-26 में खनन और जल क्षेत्र में अधिक परियोजनाएं मिलने से ऑर्डर में बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि सड़क क्षेत्र में सुधार धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन वर्ष 2026-27 से इसमें तेज़ी आने की उम्मीद है। सरकारी बजट में पूंजीगत खर्च में वृद्धि और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से इस क्षेत्र में सुधार आने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि वर्ष 2026-27 में कुल ऑर्डर प्रवाह में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। जल जीवन मिशन परियोजनाओं की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ाए जाने और अधिक बजट आवंटन से भी इस क्षेत्र को समर्थन मिलेगा।
पश्चिम एशिया में चुनौतियां बनी रहेंगी
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में काम कर रही कंपनियों को भू-राजनीतिक तनाव के कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। निर्माण कंपनियों की परिचालन लाभप्रदता वर्ष 2025-26 में 10.3 से 10.8 प्रतिशत और वर्ष 2026-27 में 10.1 से 10.6 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इस पर बिटुमेन की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव पड़ेगा। बिटुमेन, जो कच्चे तेल से बनने वाला उत्पाद है, उसकी कीमतों में पश्चिम एशिया में तनाव और क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण वृद्धि देखी गई है।

