भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि Rupee में लगातार हो रही मजबूती के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ( FPI ) आने वाले हफ्तों में भारतीय बाजारों में अपनी खरीदारी बढ़ा सकते हैं। उनका कहना है कि अब विदेशी निवेशकों की ओर से बड़ी बिकवाली की संभावना काफी कम हो गई है, जिससे बाजार को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषकों के अनुसार, Nifty 500 की वित्त वर्ष 2025-26 की अनुमानित आय वृद्धि 15.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह मजबूत आय वृद्धि बाजार को मूलभूत आधार प्रदान कर रही है और उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूती बनाए रखने में मदद कर रही है। हालांकि, इस वर्ष अब तक कमजोर मानसून चिंता का विषय बना हुआ है। यदि मानसून में सुधार नहीं होता है, तो इसका असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था की गति पर पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में 15 जून के बाद स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है। 19 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 3 कारोबारी दिनों में शेयरों की खरीदारी की, जबकि केवल 2 दिनों में बिकवाली की।
आंकड़ों के अनुसार, 19 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने नकद बाजार में ₹.3,386 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से जारी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर अब लगभग समाप्त होता दिखाई दे रहा है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव की सबसे बड़ी वजह Rupee की स्थिरता और उसमें धीरे-धीरे आ रही मजबूती है। मजबूत घरेलू मुद्रा विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
भारतीय Rupee ने भी हाल के दिनों में अच्छी रिकवरी दर्ज की है। 20 मई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका स्तर 96.96 तक पहुंच गया था, जो अब 19 जून को सुधरकर 94.34 पर बंद हुआ। यह सुधार विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान एफ.सी.एन.आर. (बी) बॉण्ड के माध्यम से बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर का निवेश भारत में आने की संभावना है। इसके साथ ही ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 80 डॉलर के स्तर तक आई गिरावट भी भारत के लिए राहत लेकर आई है। इससे चालू खाता घाटे के वित्तपोषण में दबाव कम रहेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, विदेशी निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान के कुछ चुनिंदा शेयरों में अत्यधिक निवेश को लेकर जोखिम महसूस कर रहे हैं। इसके बावजूद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े कारोबार की तेज वृद्धि और सैमसंग, एस.के. हाइनिक्स तथा टी.एस.एम.सी. जैसी कंपनियों की मजबूत लाभप्रदता की उम्मीद इन शेयरों को अभी भी आकर्षक बनाए हुए है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशक इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट आने पर खरीदारी जारी रख सकते हैं। वहीं, भारतीय बाजार में तेज बढ़त के दौरान कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद Rupee की मजबूती और भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतकों के कारण आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है।

