बिजनेस रेमेडीज़/नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने फ्लैट बुकिंग की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए अब स्टांप ड्यूटी को अनिवार्य कर दिया है। अब किसी भी नए हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करते समय ही उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा और स्टांप ड्यूटी भरनी होगी। पहले प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद फ्लैट का रजिस्ट्रेशन होता था। हालांकि बिल्डरों को यह नया नियम पसंद नहीं आया है। उनका कहना है कि बुकिंग रद्द करने पर चुकाई गई स्टांप ड्यूटी वापस कैसे मिलेगी, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है।
नए नियम के तहत बिल्डर को अब फ्लैट की कुल कीमत का 10% भुगतान मिलने के बाद खरीदार के साथ ‘एग्रीमेंट टू सेल’ रजिस्टर्ड कराना होगा और फ्लैट के मूल्य के अनुसार स्टांप ड्यूटी देनी होगी। वहीं, फ्लैट हैंडओवर के समय रू 100 के स्टांप पेपर पर ‘पजेशन डीड’ साइन की जाएगी। प्राधिकरण का कहना है कि इस नियम से फ्लैट खरीदने वालों को फायदा होगा और बिना रजिस्ट्री के फ्लैट ट्रांसफर होने की समस्या रुकेगी। स्टांप ड्यूटी आमतौर पर फ्लैट की कुल कीमत का 6 से 7% तक होती है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुकिंग के समय ही स्टांप ड्यूटी के भुगतान से बिल्डर खुश नहीं है। क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष मनोज गौड़ का कहना है कि यह व्यवस्था अव्यवहारिक है क्योंकि बुकिंग रद्द होने की स्थिति में स्टांप ड्यूटी की वापसी को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। करीब 25 फीसदी तक बुकिंग्स विभिन्न कारणों से कैंसिल हो जाती हैं, ऐसे में खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हावेलिया ग्रुप के एमडी निखिल हावेलिया ने कहा कि यह नियम एनआरआई खरीदारों के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि वे प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन के लिए भारत नहीं आ सकते, इससे उनके निवेश पर असर पड़ेगा और रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार धीमी हो सकती है।
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने इस निर्णय को एकतरफा बताते हुए कहा कि जब पजेशन की कोई गारंटी नहीं है, तो खरीदारों से पूरी स्टांप ड्यूटी लेना गलत है। यह केवल उनकी आर्थिक बोझ बढ़ाएगा। बेहतर होता कि 10% भुगतान पर ‘एग्रीमेंट टू लीज’ किया जाता। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।

