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महाराष्ट्र में वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च तीन लाख बारह हजार करोड़ रुपये के पार

by Business Remedies
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Maharashtra Government Budget Expenditure and Economic Survey 2025-26

मुंबई,

महाराष्ट्र सरकार को वर्ष 2025-26 के दौरान कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और कर्ज पर ब्याज भुगतान के लिए कुल मिलाकर लगभग तीन लाख बारह हजार पाँच सौ छप्पन करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। यह राशि राज्य के कुल राजस्व व्यय का आधे से अधिक हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025-26 में राज्य का कुल राजस्व व्यय लगभग छह लाख छह हजार आठ सौ पचपन करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य सरकार को वर्ष 2025-26 में कुल राजस्व प्राप्तियां लगभग पाँच लाख साठ हजार नौ सौ चौंसठ करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके मुकाबले सरकार के नियमित खर्च में लगातार बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य सरकार का कर्मचारियों के वेतन पर खर्च एक लाख बहत्तर हजार सात सौ साठ करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कुल राजस्व व्यय का लगभग 28.5 प्रतिशत होगा। पिछले वर्ष 2024-25 में यह खर्च एक लाख छियालीस हजार सैंतीस करोड़ रुपये था, जो कुल राजस्व व्यय का 25.9 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट है कि कर्मचारियों के वेतन का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

पेंशन भुगतान में भी तेज वृद्धि

राज्य सरकार को पेंशन भुगतान के लिए भी बड़ी राशि खर्च करनी होगी। वर्ष 2025-26 में पेंशन पर लगभग पचहत्तर हजार एक सौ सैंतीस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो कुल राजस्व व्यय का 12.4 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में यह खर्च साठ हजार अड़तीस करोड़ रुपये था, जो कुल राजस्व व्यय का 10.7 प्रतिशत रहा था। सरकार को अपने कर्ज पर ब्याज भुगतान के रूप में भी बड़ी राशि देनी होगी। वर्ष 2025-26 में ब्याज भुगतान पर लगभग चौंसठ हजार छह सौ उनसठ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो कुल राजस्व व्यय का 10.7 प्रतिशत है। पिछले वर्ष यह खर्च चौवन हजार छह सौ सतासी करोड़ रुपये था।

अनुदान और अन्य मदों पर खर्च

राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं और संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान (गैर वेतन) पर लगभग एक लाख सत्तर हजार पाँच सौ छियालीस करोड़ रुपये खर्च करेगी, जो कुल राजस्व व्यय का 28.1 प्रतिशत होगा। वर्ष 2024-25 में यह राशि एक लाख अठहत्तर हजार चौरानवे करोड़ रुपये थी। इसके अलावा अन्य मदों पर लगभग पैंसठ हजार दो सौ पच्चीस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो कुल राजस्व व्यय का 10.7 प्रतिशत होगा। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025-26 में राज्य का कुल राजस्व व्यय छह लाख छह हजार आठ सौ पचपन करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2024-25 में यह पाँच लाख बासठ हजार नौ सौ निन्यानवे करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि राज्य के नियमित खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है।

विदेशी निवेश और निर्यात में महाराष्ट्र की मजबूत स्थिति

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2025 के बीच भारत में आने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में महाराष्ट्र का हिस्सा सबसे अधिक रहा है। इस अवधि में देश में आए कुल निवेश में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत रही है। वर्ष 2024-25 के दौरान भारत के कुल निर्यात में महाराष्ट्र का योगदान लगभग 15 प्रतिशत रहा। वहीं चालू वर्ष में जनवरी 2026 तक राज्य से सॉफ्टवेयर निर्यात लगभग एक लाख चौहत्तर हजार सात सौ अट्ठानवे करोड़ रुपये दर्ज किया गया। सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं नीति 2023 लागू होने के बाद दिसंबर 2025 तक राज्य में सैंतीस सार्वजनिक सूचना प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित किए गए हैं। इनमें लगभग अठारह हजार पाँच सौ पंचानवे करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और करीब दो लाख सत्तर हजार लोगों को रोजगार मिला है।

स्टार्टअप और सूक्ष्म उद्योगों में बढ़ोतरी

दस फरवरी 2026 तक देश में पंजीकृत कुल स्टार्टअप में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। उद्योग पंजीकरण पोर्टल पर दिसंबर 2025 तक राज्य में कुल तिरसठ लाख पचासी हजार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग पंजीकृत थे। इनमें बासठ लाख ग्यारह हजार सूक्ष्म उद्योग, एक लाख पचपन हजार लघु उद्योग और अठारह हजार मध्यम उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों में कुल मिलाकर लगभग दो करोड़ बावन लाख चौरासी हजार लोगों को रोजगार मिला है। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र उद्योग, निवेश और सेवा नीति 2025 की घोषणा भी की है। इस नीति का उद्देश्य महाराष्ट्र को वैश्विक स्तर पर प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनाना, बड़े निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और नई तकनीक के उपयोग को तेजी से आगे बढ़ाना है।



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