भारत कृषि प्रदान देश है। यहां की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर करती है। इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कृषि पर ध्यान देते हुए कई योजनाओं को शामिल कर किसानों को राहत देने का प्रयास किया है। बजट में इस बार सबसे ज्यादा जोर कृषि सेक्टर पर दिया गया। कृषि क्षेत्र के विकास और उत्पादकता में वृद्धि के लिए कई उपायों की घोषणा की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए मिलने वाले ऋण की अधिकतम सीमा को तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख किए जाने को कृषि क्षेत्र का क्रांतिकारी कदम माना जा सकता है। इससे लगभग 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों एवं पशुपालकों को लघु अवधि के ऋणों की सुविधा मिलेगी। किसानों के हितों को देखते हुए प्रौद्योगिकी सहायता दी जाएगी, जो वस्त्र क्षेत्र के विकास में सहायक होगी। किसानों की आय बढ़ेगी और भारत के परंपरागत वस्त्र क्षेत्र में नई जान आएगी। वहीं बिहार में मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा करते हुए उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन व्यवस्था में सुधार होने की पूरी उम्मीद है। वहीं सरकार की योजनाओं से देश की खेती-किसानी उन्नत होने के साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं से जहां खेती-किसानी के पारंपरिक तौर तरीकों में बदलाव आया है। वहीं फसल का उत्पादन बढऩे, उसका उचित मूल्य मिलने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होने से किसान भी उल्लासित हुआ है। बजट में दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़े कदम के रूप में छह साल का मिशन अरहर, उड़द और मसूर उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित किया है। इस पहल के तहत, सहकारी संस्थाएं नेफेड और एनसीसीएफ इन एजेंसियों के साथ समझौते करने वाले पंजीकृत किसानों से चार साल तक दालों की खरीद कर सकेंगी। वहीं राष्ट्रीय उच्च पैदावार बीज मिशन शुरू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अनुसंधान इकोसिस्टम को मजबूत करना, लक्षित विकास और उच्च पैदावार वाले बीजों का प्रसार करना और बीजों की 100 से अधिक किस्मों को वाणिज्यिक स्तर पर उपलब्ध कराना होगा। कपास की खेती की उत्पादकता और निरंतरता में पर्याप्त सुधार लाने के लिए 5 वर्षीय मिशन की घोषणा की गई है और कपास की अधिक लंबे रेशे वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा।

