किसी देश की अर्थव्यवस्था का अनुमान उसकी जीडीपी के आंकलन से होता है। आपको बता दें भारत की जीडीपी वित्त वर्ष,२५ की तीसरी तिमाही में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। पिछले दिनों ही केंद्र सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। दिसंबर तिमाही में भारत की विकास दर 6.2 फीसदी रही है। विकास दर का अनुमान थोड़ा ज्यादा लगाया था, पर .१ कम ही रही। जहां सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ ५.४ फीसदी पर थी। अर्थव्यवस्था की जांच परख करने के लिए देशभर में जीडीपी का आंकलन करना होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सेवा मूल्य को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं, उसे भी शामिल किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधियों का भी कहना है कि भारत को वर्ष, २०४७ तक विकसित बनाने के लिए श्रम, किसान, भूमि और न्यायिक सुधार होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा भारत को मैक्रो-इकोनॉमी की स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ ढांचागत सुधारों को लागू करना होगा। जहां तक केंद्र सरकार ने वर्ष,२०४७ तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, उसे देखते हुए देश की सालाना जीडीपी ग्रोथ 8-9 फीसदी होनी चाहिए। पर अभी तक इस लक्ष्य को पूरा करने में काफी समय लगेगा, तभी देश विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा। पिछले तिमाही की जीडीपी को देखते हुए यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2025 और अगले वित्त वर्ष, 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। जहां सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 5.4 फीसदी पर थी। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में जुलाई से सितंबर तिमाही में बहुत धीमी गति देखने को मिली थी, जिसमें जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर 5.4 फीसदी पर आ गई, जो सात तिमाहियों में सबसे धीमी थी। अर्थशास्त्रियों ने इस मंदी के लिए कमजोर शहरी मांग और पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के कारण सरकारी खर्च में देरी को जिम्मेदार ठहराया था। वैसे अर्थव्यवस्था के ग्रोथ देने के लिए भारत को टैरिफ दरों में और कमी करने की जरूरत है।

