अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से शासन की बागडोर संभाली है, तब से उनकी ओर से लिए जा रहे ताबड़तोड़ फैसलों ने पूरी दुनिया में हडक़ंप मचा रखा है। पिछले दिनों जो ट्रंप ने स्टील और एल्यूमीनियम आयात पर २५ फीसदी टैैरिफ लगाने का फैसला किया है। ऐसे में भारत से अमेरिका को होने वाले इन वस्तुओं के निर्यात में और कमी आ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो भारतीय बाजार में इस्पात की आपूर्ति अधिक होने का जोखिम बढ़ सकता है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या टैरिफ केवल एक आर्थिक नीति है या यह अब कोल्ड वार का हिस्सा बन चुका है? ट्रंप जहां अपने देश में इस्पात एवं एल्युमीनियम के आयात पर शुल्क लगाने के अलावा सभी देशों से आयात पर समान शुल्क लगाने की इच्छा रखते हैं। भारत ने जहां वर्ष,२०२३ में ४ बिलियन डॉलर का इस्पात और १.१ बिलियन डॉलर का एल्यूमीनियम निर्यात किया है। ऐसे में काफी समय से मेटल इंडेक्स में २.६ फीसदी की गिरावट आ गई है। जनवरी,२०२४ में भारत और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देश बिना टैरिफ के ३.३६ लाख टन स्टील-एल्युमीनियम के आयात-निर्यात पर सहमत हुए थे। २५ फीसदी टैरिफ लगने से भारत के लिए निर्यात महंगा हो जाएगा। भारत फिलहाल अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले उच्च आयात शुल्क से निपटने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। सरकार के पास जवाबी कार्रवाई करने का भी विकल्प है। भारत ने जहां वर्ष,२०१८ में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जवाबी शुल्क लगाया था। उस समय अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए इस्पात के आयात पर २५ फीसदी और एल्युमीनियम के आयात पर १० फीसदी शुल्क लगा दिया था। अमेरिका अगर अब स्टील और एल्युमीनियम पर २५ फीसदी टैरिफ लगाएगा तो वहां के खरीददारों को ये धातु और इनके उत्पाद खरीदना काफी महंगा पड़ेगा। इससे अमेरिका में इन दोनों धातुओं के आयात में गिरावट आएगी। अगर अमेरिका इन धातुओं को खरीदना कम करेगा तो भारत को हर साल अरबों रुपए का नुकसान हो सकता है। जहां मैक्सिको, कनाडा और चीन से आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ वृद्धि कर उन्होंने इन देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ा दिया है।

