देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेक इन इंडिया का विजन धीरे-धीरे सार्थक नजर आता दिख रहा है। पहले सेमीकंडक्टर के चिप में भारत आत्मनिर्भर बना। कोरोना महामारी के दौरान जब आयात-निर्यात ठप्प होकर रह गया था, तो सेमीकंडक्टर चिप्स की सप्लाई प्रभावित होने से भारत में व्यापक स्तर पर उत्पादन प्रभावित हुआ। भारत ही नहीं अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियां भी प्रभावित हुईं। तब भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए और आज इस ओर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में है। वहीं अब केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले भारत के 12 बड़े पोट्र्स ने पिछले माह ही 72.2 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया है। यह पिछले साल समान अवधि में रिकॉर्ड किए गए कार्गो से 3.22 फीसदी अधिक है। यह भारत के मेक इन इंडिया विजन को आगे बढ़ाने में सार्थक सिद्ध होगा और यह सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। वहीं $कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में अमरीका और चीन के बढ़ते दबदबे की चुनौती देने के लिए केंद्र सरकार ने पहल करते हुए स्वदेशी एआई मॉडल बनाने पर काम शुरू कर दिया है। पिछले दिनों ही केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 10,370 करोड़ रुपए के इंडिया एआई मिशन के हिस्से के रूप में खुद का बड़ा घरेलू भाषा मॉडल (लॉर्ज लैंग्वेज मॉडल यानी एलएलएम) तैयार किया जाएगा, इसे वर्ष,2025 के अंत तक लॉन्च करने की पूरी संभावना है। वहीं पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का भी इस बारे में कहना है कि गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट से सबसे अधिक 13.03 मिलियन टन कार्गो हैंडल किए गए। वहीं ओडिशा का पारादीप पोर्ट दिसम्बर में 12.84एमटी कार्गो के साथ दूसरे नंबर पर रहा है। पहले नंबर पर आने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। पूरी उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में अधिकांश सामानों में भारत आत्मनिर्भर बन जाएगा।

