भारत अपने पड़ोसी देशों के विवाद में हमेशा से चर्चा में रहा है। इस समय वह अनेक ऐसे पड़ोसी देशों से घिरा हुआ है जिनके साथ उसके रिश्ते सामान्य नहीं हैं या नरम हैं। ऐसे ही देशों में नेपाल, बंगलादेश और श्रीलंका शामिल हैं। जहां नेपाल में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के त्यागपत्र के बाद चौथी बार सत्तारूढ़ हुए के.पी. शर्मा ओली के पिछले कार्यकालों के समय से ही भारत और नेपाल के रिश्ते तनावपूर्ण बने रहे हैं, वहीं बंगलादेश में अवामी लीग की नेता और प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने और वहां यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के साथ भी भारत के रिश्ते सामान्य से दूर हैं। कोलम्बो के साथ भी भारत के रिश्तों में दूरी बनी हुई है। इस तरह की पृष्ठïभूमि में भारत सरकार ने नेपाल द्वारा बंगलादेश को बिजली पहुंचाने के लिए मदद का ऐतिहासिक समझौता किया है। तीन देशों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारी बिजली संकट से जूझ रहे बंगलादेश को भारत के ‘ट्रांसमिशन लाइन’ (ग्रिड) के जरिए नेपाल से बिजली भेजी जाएगी। इससे इस क्षेत्र में ‘ऊर्जा सहयोग’ को भी बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते के अंतर्गत बंगलादेश को 40 मेगावाट बिजली निर्यात की गई और अब जून, 2025 से नेपाल-बंगलादेश को फिर से बिजली निर्यात करेगा। भारत सरकार का कहना है कि नेपाल से बंगलादेश को 40 मेगावाट की आपूर्ति करना एक मजबूत ‘दक्षिण एशियाई बिजली ग्रिड’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बिजली भारत की 400 के.वी. मुजफ्फरपुर-बहरामपुर-भेरामारा ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से बंगलादेश तक पहुंचेगी। ‘नेपाल इलेक्ट्रीसिटी अथारिटी’ के प्रवक्ता के अनुसार 5 वर्ष का बिजली निर्यात समझौता सहमत अवधि के दौरान बिना किसी रुकावट के बंगलादेश को बिजली देने में नेपाल को सक्षम बनाता है। वहीं श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यटन से लेकर बैंकिंग क्षेत्र तक भारत की सहायता श्रीलंका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वर्ष, 2022 से ही भारत द्वारा श्रीलंका को आॢथक सहायता उसके संकटों को दूर करने वाली रही है। दोनों ही सकारात्मक घटनाक्रमों से बंगलादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ हमारे नरम पड़े रिश्तों में गर्माहट पैदा होने की आशा बंधी है। ऐसा लगता है कि चारों देश एक बार फिर अपने रिश्तों को पहले की तरह सजीव करने की दिशा में चल पड़े हैं। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बंगलादेश से शेख हसीना के निष्कासन और उनके भारत में शरण लेने के बाद से बंगलादेश के साथ भी भारत के संबंधों में भारी तनाव आ गया है। वहां हिन्दुओं पर बड़ी संख्या में हमले जारी हैं जिसके विरुद्ध बंगलादेश में ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों में प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

