केंद्र सरकार के बजट-२०२६-२७ को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। व्यापारिक संगठनों और उद्यमियों से इसके लिए सुझाव भी लिए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से 1 फरवरी को संसद में बजट पेश की पूरी उम्मीद है। इस बजट में सरकार का मुख्य फोकस वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू खपत को बढ़ाना, वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और बुनियादी ढांचे के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय पर होगा। यह बजट भारत की आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता देगा। इसके अलावा उम्मीद है कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति प्रदान करेगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने की संभावना है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के विस्तार और जलवायु-अनकूल कृषि के लिए विशेष फंड का प्रावधान हो सकता है। बुनियादी ढांचे के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय पर ध्यान दिया जाएगा। क्रेडिट एक्सेस और आसान रेगुलेटरी नियमों की उम्मीद है। कैंसर स्क्रीनिंग, प्रारंभिक पहचान कार्यक्रमों और किफायती उपचार विकल्पों के लिए आवंटन बढ़ सकता है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजनाएं जारी रह सकती हैं और स्टार्टअप्स के लिए आसान नियम व ऋण उपलब्ध कराए जा सकते हैं। तकनीक और नवाचार-एआई रिसर्च, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए विशेष फंड और नीतियों की उम्मीद है। रेलवे, सडक़ और स्मार्ट सिटीज जैसे ढांचागत विकास परियोजनाओं में पूंजीगत व्यय जारी रहने की संभावना है। स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्र्रित किया जाएगा। वहीं 1 अप्रैल, 2026 से नए टैक्स ईयर की संकल्पना लागू हो सकती है। कौशल विकास और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाएगा।

