अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेज बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर ट्रंप की टैरिफ नीति ने दुनिया के तमाम देशों को झटका दिया है। इसका प्रभाव यूरोपीय देशों पर देखने को मिल रहा है। वहीं पिछले दिनों ही भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने से दोनों के व्यापार में मजबूती आएगी। इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे व्यापार और निवेश बढ़ेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। जहां एक ओर यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और इस समझौते से व्यापार में और वृद्धि होगी। यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दूसरी ओर श्रम-प्रधान उद्योगों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भारत और यूरोपीय संघ सुरक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाएंगे, जिससे दोनों को लाभ होगा। भारतीय कपड़ों, चमड़ा उत्पादों और जूतों पर लगने वाली 10 फीसदी तक की ड्यूटी कम या खत्म हो सकती है, जिससे ये यूरोपीय बाजार में और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। दवाओं और केमिकल्स के लिए नियमों को आसान बनाने से निर्यात में 20-30 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। फ्रांस-जर्मनी जैसे देश भारत में रक्षा फैक्ट्रियां लगा सकते हैं, जिससे तकनीकी हस्तांतरण बढ़ेगा। दोनों पक्ष ग्रीन हाइड्रोजन पर मिलकर काम करेंगे। यूरोप, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस डील से निर्यात में भारी वृद्धि होगी। कपड़ा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होने से लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। यूरोप से आने वाली वाइन, कारें और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं। इसलिए उन पर लगने वाला टैक्स कम होगा। यह समझौता भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल को गति देगा और यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा।

