भारत में प्रदूषण की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। खासकर उत्तर और पूर्वी राज्य दिल्ली, असम, बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य सबसे अधिक प्रदूषित हैं। इन राज्यों में वायु प्रदूषण के कारण दिन पर दिन लोगों को श्वसन और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रदूषण के प्रमुख कारण वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक उत्सर्जन, कूड़ा जलाना, पराली जलाना और धूल और निर्माण कार्य है। वर्तमान में लोगों की जरूरतें लगातार बढ़ रही है। जब आबादी बढ़ती है, तो उसी अनुपात में उसकी जरूरतें भी बढ़ जाया करती है। ऐसी स्थिति में प्रदूषण ना बढ़े, कदापि संभव नहीं है। प्रदूषण से निजात पाने के विभिन्न उपायों को अपनाने की महत्ती आवश्यकता है। आबादी बढ़ी तो गाडिय़ां भी बढ़ीं। इनसे फैलने वाले प्रदूषण के लिए अब इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जाए। कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जो उपयोग के बाद अनुपयोगी हो जाया करती है, उनका पुनर्निर्माण संभव है। ऐसी वस्तुएं अधिकांशत: प्लास्टिक से बनने वाली हो सकती है। कृषि क्षेत्र में पुआल आदि जलाने से जो प्रदूषण फैलता है, उसे जलाने की बजाय उन वस्तुओं का अन्य कार्यों में उपयोग तलाशा जा सकता है। कूड़े-करकट से कृषि हेतु खाद आदि तैयार की जा सकती है। प्रदूषण को कुछ हद तक कम करने के लिए केंद्र सरकार भी इस ओर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम, वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए पहल और वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की स्थापना कर प्रदूषण को काफी हद तक कम करने में जुटी हुई है।




