हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भोपाल गैस त्रासदी की याद में आज राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाएगा। भोपाल गैस त्रासदी 2-3 दिसंबर, 1984 की रात को हुई थी, जब यूनियन कार्बाइड के रासायनिक संयंत्र से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट का रिसाव हुआ था। इस त्रासदी में लगभग 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे और हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूक करना है और उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करना है। यह दिन हमें प्रदूषण के प्रभावों के बारे में जागरूक करता है तथा हमें स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है। प्रदूषण कई प्रकार का होता है, जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण। इन सभी प्रकार के प्रदूषण का हमारी सेहत और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण के कारण सांस से जुड़ी बीमारियां, कैंसर और कई अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यह जैव विविधता को भी नष्ट करता है और जलवायु परिवर्तन की भी एक बड़ी वजह है। वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से बनाई गई नीतियों और कानूनों के बारे में लोगों को बताना है। उद्योगों में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता फैलाना है। प्रदूषण कम करने के लिए आम नागरिकों को भी जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करना है। प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसके लिए हमें सभी को मिलकर काम करना होगा। हम सभी अपनी जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव करके प्रदूषण को कम करने में योगदान दे सकते हैं। हम सब मिलकर एक स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

