दीपावली से पहले देश में अस्थमा रोगियों की तादाद बढ़ जाती है, इसका मुख्य कारण है भारत में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण है। दिवाली से पहले अधिकांश लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं और वहां से निकले कचरे, धूल-मिट्टी से अस्थमा रोगियों की संख्या में इजाफा हो जाता है। इसके अलावा दीपावली के दिन चलने वाले पटाखों और आतिशबाजी का अत्यधिक उपयोग होने से उनकी हालत और ज्यादा खराब हो जाती है। वहीं देश के सभी उच्च उत्सर्जन वाले उद्योगों एल्यूमीनियम, सीमेंट की फैक्ट्री और लुगदी एवं कागज से भी लगातार वायु प्रदूषण फैल रहा है। ऐसे में स्वयं अस्थमा रोगियों को सावधानियां बरतने की जरूरत है।
घर से बाहर जाएं तो नाक और मुंह पर रूमाल रखकर निकलें। वैसे भारत सरकार पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम लागू करना, स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए सख्त नियम बनाना और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए अभियान चलाना शामिल है। इसके अलावा दिल्ली जैसे शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सर्दियों की तैयारी योजनाएं और ध्वनि प्रदूषण पर नियम जैसे विशेष उपाय भी लागू किए गए हैं। पर दिवाली पर पटाखों और आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। दीपावली पर स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करके वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। सौर ऊर्जा या एलईडी लाइट्स का उपयोग करके ऊर्जा की बचत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने वृक्षारोपण के महत्व पर जोर देने के लिए पहल की है। प्रदूषण कम करने के लिए नवीन समाधानों को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली सरकार ने नवाचार चुनौतियों की घोषणा की है।

