Friday, July 24, 2026 |
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आज मनाया जाएगा सुहाग व श्रृंगार का पर्व

by Business Remedies
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वैसे तो हिंदुस्थान में हर त्योहार पर महिलाएं श्रृंगार करती हैं, परंतु जब बात करवा चौथ की आती है, तो सुहागिनों का उत्साह ही अलग होता है। इस दिन वे पूरा सोलह श्रृंगार करती हैं, पार्लर जाती हैं, मेहंदी लगवाती हैं और विशेष परिधान व गहनें पहनती हैं। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है, लेकिन इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर होता है। सार तो सभी का एक होता है पति की दीर्घायु। इसीलिए सुहागिनों के लिए यह व्रत काफी अहम है।
आज-कल देखा गया है कि कई कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ का व्रत रखती हैं, पर असल में यह व्रत केवल सुहागिनों के लिए ही होता है। देश के कुछ क्षेत्रों में कुंवारियों के यह व्रत रखने की परंपरा जरूर है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुहागिनें अपनी मां या अपनी सास से करवा चौथ का महत्व व विधि सीखती आई हैं। जिसमें सबसे अहम करवा चौथ की आवश्यक संपूर्ण पूजन सामग्री को व्रत से पहले ही एकत्रित करने की सीख दी जाती रही है। सुहागन पूरे दिन निर्जला रहकर शिव-पार्वती व गणेशजी का ध्यान करती हैं। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित काती है। इसे वर कहते हैं। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि बड़ी पुरानी परंपरा है।
साथ ही कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर करवा उन्हें दे देना चाहिए। रात्रि में चंद्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें। ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। हर क्षेत्र के अनुसार पूजा करने का विधान और कथा अलग-अलग होता है। इसलिए कथा में काफी ज्यादा अंतर पाया गया है।



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