दुनिया भर में आज यूएफओ दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य अज्ञात उडऩे वाली वस्तुओं (यूएफओ) के अस्तित्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। विश्व भर के वैज्ञानिक इस ओर अंतरिक्ष मिशन में यात्रियों को भेजकर इसकी खोज करने में जुटे हुए हैं। इस ओर गगनयान मिशन और भविष्य की अंतरिक्ष परियोजनाएं भारत को और भी अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएंगी, जिससे वह अंतरिक्ष में अग्रणी भूमिका निभाएगा। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम वर्ष, १९६० के दशक में शुरू हुआ था, तब से देश ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 24 जून, 1947 को केनेथ अर्नोल्ड नामक एक पायलट ने नौ उडऩ तश्तरी जैसी वस्तुओं को देखने की जानकारी दी, तो इसके कुछ दिनों बाद 2 जुलाई, 1947 को रोसवेल, न्यू मैक्सिको में एक कथित यूएफओ दुर्घटना हुई, जिसने इस घटना को और अधिक चर्चा में ला दिया। वर्ष, 2001 में यूएफओ शोधकर्ता हकटन अकडोगन ने 24 जून को विश्व यूएफओ दिवस के रूप में स्थापित किया, लेकिन बाद में इसे 2 जुलाई को रोसवेल घटना की वर्षगांठ के साथ समायोजित किया। विश्व यूएफओ दिवस इसमें रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है, यह खुली और सम्मानजनक बहस के लिए एक मंच प्रदान करता है। इसके अलावा मिथकों और पूर्वाग्रहों को दूर करता है और यूएफओ के देखे जाने की वैज्ञानिक जांच का समर्थन करता है। यह ब्रह्मांड की अज्ञात और अनंत संभावनाओं के बारे में हमारी जिज्ञासा की याद दिलाता है। यह कई रहस्यों और अनसुलझे संघर्षों पर विचार करने और उत्तर खोजने का मौका लेने का दिन है। आज के दिन यूएफओ उत्साही और शोधकर्ता अकसर सम्मेलनों, सेमिनारों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

