कोविड-19 महामारी के बाद से दो से तीन वर्ष तक कपड़ा उद्योग की नाजुक स्थिति बनी हुई थी। पर पिछले दो वर्षों से कपड़ा उद्योग फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। गत महीनों में ही भारत के कपड़ा निर्यात में वृद्धि देखी जा रही है। मई,२०२५ में कपड़ा निर्यात११.३ फीसदी बढ़ा है। जहां भारतीय वस्त्र उद्योग विश्व के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, जो वैश्विक वस्त्र और परिधान व्यापार का 4 फीसदी हिस्सा है। यह उद्योग कई शताब्दियों पुराना है और इसमें बहुत विविधता है। एक ओर जहां हाथ से काते और बुने वस्त्र उद्योग हैं, वहीं दूसरी ओर पूंजी-प्रधान आधुनिक मिलें हैं। पिछले माह कपड़ा उद्योग में वृद्धि ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देश भारत को विश्वासपात्र सप्लायर के रूप में देख रहे हैं। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि बांग्लादेश में इनदिनों अस्थिरता बनी हुई है और चाइना में भारी टैरिफ से कई देश वहां से कपड़ा मंगवाने में कतरा रहे हैं। ऐसे में भारत को इसका लाभ उठाते हुए निरंतर कपड़े के निर्यात पर अपना फोकस करना चाहिए। सितंबर,२०२४ में भारत का कपड़ा निर्यात 17.3 फीसदी से बढक़र अक्टूबर में 24.35 फीसदी हो गया था। इसके बाद यह निरंतर बढ़ रहा है। जहां कपड़ा खरीद एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और अंतरराष्ट्रीय खरीदार सप्लाई चेन में अनिश्चितता पसंद नहीं करते। बांग्लादेश की स्थिति को देखते हुए कई बड़े ऑर्डर अब भारत को किए जा रहे हैं। कई जानकारों का यह भी मानना है कि अगर भारत को कच्चा माल प्रतिस्पर्धी दरों पर मिलना शुरू हो जाए तो निर्यात में और भी अच्छी बढ़त देखी जा सकती है। जो भारत के कपड़ा उद्योग की रफ्तार को बढ़ाने में कामयाब हो सकेगा।

