भारत में सबसे सुरक्षित यात्रा विमान की कही जाती है, लेकिन पिछले दिनों हुई विमान क्रेश की घटना ने हमारे विमानों की खामियों को उजागर किया है। वहीं अधिकांश यात्री अब विमान से यात्रा करने से कतरा भी रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय विमानन उद्योग को घाटा का सामना भी करना पड़ सकता है। एयर इंडिया दुर्घटना ने विमानन से जुड़े इक्विटी और आस-पास के उद्योगों में नए सिरे से जांच को जन्म दिया है। अहमदाबाद की घटना के बाद एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, साथ ही तेल की बढ़ती कीमतों ने भी इसमें योगदान दिया। बढ़ती विमान क्रेश की घटनाओं ने यात्रियों को सोचने का मजबूर कर दिया है कि अब विमान से नहीं रेल से ही यात्रा करना सुरक्षित है। यह हादसा बोइंग ७८७-८ ड्रीमलाइनर विमान के साथ हुआ, जो अहमदाबाद से लंदन जा रहा था। इस दुर्घटना में २७४ लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें विमान यात्री और स्थानीय लोग शामिल थे। इसकी वजह चाहे कुछ भी रही हो, लेकिन यह तो साफ है कि यात्रियों में विमान यात्रा करने में अब भय व्याप्त हो गया है। वहीं दो दिन पहले ही केदारनाथ में हेलिकॉप्टर दुर्घटना भी इसका जीता जागता उदाहरण है। लोगों की आस्था केंद्र में ऐसी दुर्घटना होना बहुत ही दुखदायी है। जहां ७ लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना गौरीकुंड क्षेत्र के पास हुआ था। हादसे की वजह फिलहाल खराब मौसम को माना जा रहा है, जिसमें कम विजिबिलिटी के कारण पायलट को हेलिकॉप्टर को सुरक्षित निकालने में परेशानी हुई। जहां एक ओर अहमदाबाद में हाल ही में हुए एयर इंडिया के प्लेन क्रेश के बाद विमानन उद्योग में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं दूसरी ओर विमान दुर्घटना के बाद हवाई यात्रा की सुरक्षा और यात्री बीमा के महत्व को लेकर चिंताएं फिर से उभर आई हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बीमा को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों के लिए बीमा को गंभीरता से लेने का समय आ गया है। सरकारी नियमों का इंतजार करने के बजाय व्यक्तियों को खुद ही उचित कवरेज हासिल करने की पहल करनी चाहिए।

