देश में अर्थव्यवस्था को उच्च स्तर पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अच्छी पहल की है। गत दिनों ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए नीतिगत छूट की एक श्रृंखला की घोषणा की है। इसका मुख्य लक्ष्य इन क्षेत्रों के भीतर विशेष रूप से अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक घटकों में उच्च तकनीक विनिर्माण को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में हम सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट बनाने में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएंगे, ऐसी पूरी उम्मीद है। यह हरेक भारतवासी के लिए खुशी की बात भी है कि इससे देश में उच्च कौशल वाली नौकरियों में इजाफा हो सकेगा। यह बदलाव अग्रणी निवेश आकर्षित करने, नियामक बाधाओं को कम करने और वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए हैं। एसईजेड नियम, 2006 के नियम 5 में संशोधन के बाद सेमीकंडक्टर या इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए विशेष रूप से स्थापित एसईजेड को केवल १० हेक्टेयर के न्यूनतम भूमि क्षेत्र की जरूरत होगी, जो पहले ५० हेक्टर थी। इसके अतिरिक्त एसईजेड नियम-२००६ के नियम ७ में संशोधन से एसईजेड के लिए अनुमोदन बोर्ड को एसईजेड भूमि को केंद्र या राज्य सरकार या उनकी अधिकृत एजेंसियों के पास लीज पर दिए जाने के मामले में ऋण मुक्त होने की शर्त में ढील की अनुमति मिलती है। जहां एसईजेड के लिए मंजूरी बोर्ड ने दो प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी है, इसमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड (एक्वस ग्रुप) शामिल हैं।

