Tuesday, July 14, 2026 |
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विभिन्न राज्यों में जीएसटी संग्रह वृद्धि में अंतर का हो विश्लेषण

by Business Remedies
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पिछले दो महीनों से राजनीतिक तनाव के बीच भारत का सकल जीएसटी संग्रह लगातार दूसरे महीने दो लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से ऊपर रहना इस बात का संकेत है कि अब अर्थव्यवस्था अपर लेबल पर पहुंच रही है। पर विभिन्न राज्यों में जीएसटी संग्रह वृद्धि में अंतर भी देखा जा रहा है। ऐसे में इसका विश्लेषण करना भी बहुत जरूरी हो गया है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों ने संग्रह में 17 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों ने छह फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे कुछ राज्यों में जीएसटी संग्रह में औसतन 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जहां देशभर में औसत वृद्धि संभवत: क्षेत्रीय या मौसमी कारकों के कारण राज्यों में समान रूप से परिलक्षित नहीं होती है। वहीं सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मई में 16.4 प्रतिशत बढक़र 2.01 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यही अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.37 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। मई, 2024 में यह संग्रह 1,72,739 करोड़ रुपए था। मई, 2025 में घरेलू लेन-देन से सकल राजस्व 13.7 प्रतिशत बढक़र लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि आयात से जीएसटी राजस्व 25.2 प्रतिशत बढक़र 51,266 करोड़ रुपए हो गया। मई, 2025 में कुल सकल जीएसटी राजस्व 2,01,050 करोड़ रुपए रहा। जीएसटी में लगातार हो रही उच्च वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक आयात पर आईजीएसटी है, जो अप्रैल में कच्चे तेल की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि को दिखाती है, जिसने जीएसटी संग्रह में समग्र वृद्धि में योगदान दिया है। अगले कुछ महीनों तक वृद्धि इसी दायरे में जारी रहती है, तो इससे सरकार को दरों को तर्कसंगत बनाने पर विचार करने का अवसर मिल सकता है।



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