बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां इनदिनों युवाओं की छंटनी में लगी हुई है। जहां दो साल पहले यही कंपनियां निरंतर युवाओं को जॉब के ऑफर दे रही थी। युवाओं के प्लेसमेंट की बाढ़-सी आ गई थी। वहीं अब माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजॉन और क्राउडस्ट्राइक जैसी बड़ी टेक कंपनियां इन दिनों छंटनी कर रही हैं। इसकी वजह कम होती कमाई, आर्थिक हालात में अनिश्चितता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। पिछले दिनों जारी आंकड़े के अनुसार 130 से ज्यादा टेक कंपनियों ने अब तक 61,000 से ज्यादा कर्मियों को निकाल दिया है। आईबीएम ने भी 2025 में 3,900 लोगों को नौकरी से निकालने का ऐलान किया है। इनमें अकेले माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 लोगों की छंटनी की है, जो वर्ष, 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी छंटनी है। इससे साफ है कि टेक इंडस्ट्री एक बड़ी चुनौती से गुजर रही है। टेक कंपनियों द्वारा की जा रही छंटनी के कई कारण सामने आ रहे हैं। जहां इन कंपनियों को आर्थिक मंदी का डर सता रहा है। इसके अलावा वह बढ़ते खर्च पर अंकुश लगाना चाहती है। कुछ कंपनियां अपने स्ट्रक्चर और रणनीति को बेहतर बनाने के लिए भी छंटनी कर रही हैं। कई कंपनियां अब नए उत्पादों, सेवाओं और अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे वे पुराने कार्यों के लिए आवश्यक कर्मियों की संख्या को कम कर रही हैं। वहीं एआई जैसे नए तकनीकों का उपयोग होना भी युवाओं की छंटनी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। ऐसे में युवा जाएं तो जाएं कहां? सरकारी नौकरियों का वैसे ही टोटा चल रहा है। जो निकलती है, उनमें भी कुछ ना कुछ घपला सामने आ ही जाता है।

