Monday, November 2, 2026 |
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कैंसर से जंग में शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार की अहम भूमिका: डॉ. कुणाल जैन

by Business Remedies
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चारु भाटिया | जयपुर

कैंसर के उपचार के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, उन्नत जांच सुविधाओं और नई चिकित्सा पद्धतियों के कारण तेजी से बदलाव आ रहे हैं। हालांकि, बीमारी की देर से पहचान, जागरूकता की कमी और उपचार की अधिक लागत आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उपचार के परिणाम बेहतर हो सकते हैं और मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है।

इस विशेष बातचीत में मेट्रो मास हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट – मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. कुणाल जैन ने भारत में कैंसर के बदलते स्वरूप, युवाओं में बढ़ते मामलों को लेकर चिंताओं, बीमारी के शुरुआती लक्षणों और कैंसर की पहचान एवं उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियों, पारिवारिक सहयोग के महत्व तथा कैंसर से जुड़े आम मिथकों को दूर करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। डॉ. जैन का कहना है कि जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार कैंसर के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न: आप मेट्रो मास हॉस्पिटल, जयपुर में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। अब तक का आपका सफर कैसा रहा है और आपने इस क्षेत्र को करियर के रूप में क्यों चुना?

उत्तर: मेरे परिवार के सदस्य मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। मेरे पिता और भाई दोनों डॉक्टर हैं। चिकित्सा क्षेत्र से परिवार के जुड़ाव ने मुझे भी स्वास्थ्य सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। मैंने आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर से एमबीबीएस किया। इसके बाद बीकानेर से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की और अहमदाबाद से डीएम की पढ़ाई पूरी की।

मेडिकल की पढ़ाई और प्रशिक्षण के दौरान मैंने महसूस किया कि कैंसर विशेषज्ञों की संख्या सीमित थी, जबकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही थी। मुझे लगा कि ऑन्कोलॉजी ऐसा क्षेत्र है, जिसमें मरीजों के जीवन में सार्थक बदलाव लाने का अवसर मिलता है। इसी सोच ने मुझे कैंसर के निदान और उपचार के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न: पिछले एक दशक में भारत में कैंसर की स्थिति में किस तरह के बदलाव आए हैं? क्या इसके मामलों, प्रकारों और प्रभावित होने वाले लोगों में बदलाव देखने को मिला है?

उत्तर: पिछले कुछ वर्षों में कैंसर को लेकर जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है। अब अधिक लोग इस बीमारी के बारे में जानते हैं, चिकित्सा परामर्श के महत्व को समझते हैं और उपचार के लिए आगे आते हैं। जांच सुविधाओं में सुधार के कारण भी ऐसे मामलों की पहचान संभव हुई है, जिनका पहले पता नहीं चल पाता था।

कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। तंबाकू का सेवन और धूम्रपान इसके प्रमुख रोकथाम योग्य जोखिम कारकों में शामिल हैं। खानपान की आदतें, पर्यावरणीय प्रभाव, शराब का सेवन और जीवनशैली में बदलाव भी कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। कृषि में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों के संपर्क को लेकर भी चिंता जताई जाती है, हालांकि इसका जोखिम संबंधित रसायन, संपर्क की अवधि और उसकी मात्रा पर निर्भर करता है।

यह समझना जरूरी है कि कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता। अलग–अलग प्रकार के कैंसर के पीछे आनुवंशिक, पर्यावरणीय, संक्रामक और जीवनशैली से जुड़े विभिन्न कारक हो सकते हैं। जागरूकता के साथ–साथ उचित जांच सुविधाओं तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है, ताकि बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सके।

प्रश्न: आजकल कम उम्र के लोगों में भी कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर: इस संदर्भ में जीवनशैली और व्यवहार से जुड़े कारकों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन मुंह, गले और फेफड़ों सहित कई प्रकार के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। शराब का सेवन भी कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है, विशेषकर जब इसके साथ तंबाकू का सेवन भी किया जाता है।

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी चिंता के विषय हैं। हालांकि, इनका कैंसर से संबंध कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग–अलग हो सकता है।

कुछ संक्रमण भी कैंसर के विकास में भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का संबंध सर्वाइकल कैंसर तथा मुंह और गले के कुछ कैंसरों से है। यह वायरस अंतरंग यौन संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। HPV के खिलाफ टीकाकरण एक महत्वपूर्ण बचाव उपाय है।

हालांकि, कम उम्र में होने वाले सभी कैंसरों के लिए जीवनशैली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आनुवंशिक संवेदनशीलता, पर्यावरणीय प्रभाव और अन्य जैविक कारक भी भूमिका निभा सकते हैं। युवाओं को तंबाकू से दूर रहना चाहिए, शराब का सेवन सीमित करना चाहिए, स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए और किसी भी असामान्य या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रश्न: कैंसर के कौन–से शुरुआती लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

उत्तर: लोगों को अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए, खासकर ऐसे लक्षणों पर जो लंबे समय तक बने रहें, बार–बार दिखाई दें या लगातार गंभीर होते जाएं।

मुंह के कैंसर के संदर्भ में यदि कोई छाला दो सप्ताह तक ठीक नहीं होता, तो उसकी जांच करानी चाहिए। तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। गर्दन या गले में बिना किसी स्पष्ट कारण के गांठ महसूस होने पर भी डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

स्तन कैंसर के मामले में स्तन में किसी नई गांठ, असामान्य मोटाई या लगातार बने रहने वाले बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक खांसी रहना, मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून आना, निगलने में कठिनाई या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी चिकित्सकीय जांच की मांग करते हैं।

मेनोपॉज यानी माहवारी स्थायी रूप से बंद होने के बाद यदि किसी महिला को योनि से रक्तस्राव होता है, तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

इन लक्षणों का अर्थ हमेशा कैंसर होना नहीं है। इनके पीछे अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। हालांकि, सही कारण का पता लगाने और किसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।

प्रश्न: क्या परिवार में कैंसर का इतिहास होने से बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है?

उत्तर: हां, परिवार में कैंसर का इतिहास कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। माता–पिता से विरासत में मिलने वाले कुछ आनुवंशिक बदलाव स्तन, अंडाशय और कोलोरेक्टल कैंसर सहित अन्य कैंसरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हर कैंसर आनुवंशिक नहीं होता और परिवार में किसी सदस्य को कैंसर होने का अर्थ यह नहीं है कि अन्य सदस्यों को भी यह बीमारी जरूर होगी।

यदि परिवार में कई लोगों को एक ही प्रकार या आपस में संबंधित कैंसर हुआ हो, कम उम्र में कैंसर का निदान हुआ हो या लगातार कई पीढ़ियों में ऐसे मामले सामने आए हों, तो विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आनुवंशिक परामर्श, उपयुक्त जांच और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को कम उम्र में कैंसर का पता चलता है, तो उसके पारिवारिक इतिहास की सावधानीपूर्वक जांच की जाती है। निष्कर्षों के आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों को भी जोखिम का आकलन कराने और जरूरत पड़ने पर कम उम्र से या अधिक नियमित अंतराल पर जांच कराने की सलाह दी जा सकती है। इसका उद्देश्य बीमारी के विकसित होने से पहले या शुरुआती चरण में ही उसकी पहचान करना है।

प्रश्न: कैंसर से जुड़ा सबसे आम मिथक क्या है, जिसे दूर करना जरूरी है?

उत्तर: सबसे आम गलत धारणाओं में से एक यह है कि कैंसर का इलाज संभव नहीं है। यह सही नहीं है। कई प्रकार के कैंसर का उपचार संभव है और शुरुआती चरण में पहचान होने पर कई कैंसर पूरी तरह ठीक भी हो सकते हैं। यदि बीमारी आगे बढ़ चुकी हो, तब भी उपचार से उसे नियंत्रित करने, लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

उपचार का परिणाम कैंसर के प्रकार, अवस्था, जैविक विशेषताओं और उपचार के प्रति उसकी प्रतिक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए सभी प्रकार के कैंसर के लिए एक जैसा परिणाम मानना सही नहीं है।

मुंह का कैंसर तंबाकू के सेवन और देर से निदान के कारण एक गंभीर चिंता बना हुआ है। सर्वाइकल कैंसर के मामले में HPV टीकाकरण और उचित स्क्रीनिंग जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसके लक्षणों पर ध्यान देना और उचित स्क्रीनिंग कराना भी जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैंसर के डर या उससे जुड़ी गलत धारणाओं के कारण डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर निदान से उपचार के परिणामों में महत्वपूर्ण अंतर आ सकता है।

प्रश्न: अंत में, आप हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: मेरा संदेश सरल है—अपने शरीर द्वारा दिए जाने वाले चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें। हर कैंसर को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कई प्रकार के कैंसर का सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है और शुरुआती चरण में पहचान होने पर कुछ कैंसर पूरी तरह ठीक भी हो सकते हैं।

तंबाकू से दूर रहें, शराब का सेवन सीमित करें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, आवश्यक टीकाकरण पर ध्यान दें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार कैंसर स्क्रीनिंग कराएं। यदि मुंह में लगातार छाला, शरीर में कोई असामान्य गांठ, असामान्य रक्तस्राव, मल त्याग की आदतों में लंबे समय तक बदलाव या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं निदान करने या इलाज में देरी करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैंसर का डर आपको चिकित्सा सहायता लेने से न रोके। जागरूकता, समय पर निदान और उचित उपचार मरीजों तथा उनके परिवारों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।



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