New Delhi,
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों के भरोसे में आई कमजोरी के कारण दुबई के रियल एस्टेट शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई है। पिछले पांच ट्रेडिंग सत्रों में इस सेक्टर से जुड़ा प्रमुख सूचकांक लगभग 20 प्रतिशत तक गिर गया है, जिससे इस साल अब तक की पूरी बढ़त लगभग समाप्त हो गई है। दुबई फाइनेंशियल मार्केट के रियल एस्टेट सूचकांक में तेज गिरावट तब देखने को मिली जब क्षेत्र में युद्ध का दायरा बढ़ने लगा और निवेशकों ने जोखिम से बचने की रणनीति अपनाई। लगातार पांच दिनों की गिरावट के कारण इस सूचकांक में इस वर्ष की शुरुआत से बनी सकारात्मक स्थिति पूरी तरह कमजोर पड़ गई। गौरतलब है कि यह सूचकांक 27 फरवरी को 16,910.3 के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। उस समय तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव सीमित था, लेकिन बाद में हालात तेजी से बिगड़ने लगे और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई।
इस वर्ष की शुरुआत में दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर में अच्छा उत्साह देखने को मिला था। सूचकांक में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी और पिछले वर्षों की तेजी भी जारी थी। वर्ष 2024 में इस सूचकांक में लगभग 63 प्रतिशत की तेज उछाल आई थी, जबकि वर्ष 2023 में इसमें लगभग 38 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि हाल के वर्षों में दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार मजबूत बनी रही। हालांकि अब क्षेत्रीय संघर्ष के कारण निवेशकों का रुख सावधानीपूर्ण हो गया है और वे बड़े निवेश निर्णयों को फिलहाल टाल रहे हैं। इसी वजह से रियल एस्टेट शेयरों में तेज बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब दुबई का रियल एस्टेट क्षेत्र पिछले वर्ष रिकॉर्ड स्तर की गतिविधि देख चुका है। संपत्ति परामर्श कंपनी एनारॉक के अनुसार वर्ष 2025 में दुबई में रियल एस्टेट लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 917 अरब दिरहम तक पहुंच गया था, जो करीब 250 अरब डॉलर के बराबर है। यह शहर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है। वर्ष 2025 के दौरान कुल लेनदेन की संख्या भी 2 लाख 70 हजार से अधिक सौदों को पार कर गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशकों और खरीदारों की भागीदारी काफी व्यापक रही।
कोरोना महामारी के बाद से दुबई का आवास बाजार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021 के बाद से शहर में संपत्ति की कीमतों में लगभग 60 से 75 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। इस कारण महामारी के बाद के दौर में दुबई को दुनिया के सबसे मजबूत प्रॉपर्टी बाजारों में से एक माना जा रहा है। इस तेजी में विदेशी निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खासतौर पर भारत के निवेशक दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में सबसे बड़े विदेशी खरीदार बनकर उभरे हैं। कुल विदेशी संपत्ति खरीद में भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 20 से 22 प्रतिशत तक बताई जाती है। दुबई में किराये से मिलने वाला प्रतिफल भी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। शहर की प्रमुख आवासीय संपत्तियों पर सालाना किराया प्रतिफल सामान्यतः 6 से 9 प्रतिशत के बीच रहता है, जो दुनिया के बड़े प्रॉपर्टी बाजारों की तुलना में काफी अधिक माना जाता है। इसी कारण भारत सहित कई देशों के दीर्घकालिक निवेशक और संपत्ति के माध्यम से अपनी संपत्ति सुरक्षित रखने की इच्छा रखने वाले खरीदार दुबई के बाजार की ओर लगातार आकर्षित होते रहे हैं। हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण फिलहाल बाजार में अस्थिरता और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

