New Delhi,
घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के बीच कीमतों पर दबाव देखा गया। साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी बहुमूल्य धातुओं को नीचे खींचा। MCX पर सोने के फरवरी वायदा भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर Rs.1,51,665 प्रति 10 ग्राम पर आ गए। वहीं चांदी के मार्च वायदा भाव 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ Rs.3,16,509 प्रति किलोग्राम दर्ज किए गए। कारोबारियों के अनुसार हालिया तेजी के बाद यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली का परिणाम है।
अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी सोने की कीमतों में नरमी रही। US Gold Futures कॉमेक्स पर इस सप्ताह की शुरुआत में 4,887 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस से ऊपर नया रिकॉर्ड बनाने के बाद 4,790 से 4,800 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में स्थिर होते दिखाई दिए। विश्लेषकों का कहना है कि टैरिफ को लेकर आशंकाएं घटने से कीमतों में अस्थायी दबाव आया है, हालांकि दीर्घकालिक तेजी का रुझान अभी भी मजबूत बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप के बीच संभावित व्यापार विवाद की आशंका उस समय कम हुई जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Greenland के अधिग्रहण को लेकर अपने रुख को नरम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय देशों पर टैरिफ नहीं लगाए जाएंगे। इस बयान के बाद बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग में कुछ कमी आई।
वायदा बाजार के आंकड़ों के अनुसार खुले सौदों में कमी देखी गई है। वर्तमान में ओपन इंटरेस्ट 9870 लॉट पर है। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के सौदों की कटौती को दर्शाती है और नई खरीदारी सीमित रही है। चांदी की बात करें तो COMEX Silver हाल ही में 95.80 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद 92 से 93 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास मजबूत कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे चांदी को समर्थन मिल रहा है।
डॉलर इंडेक्स 98.81 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो गया। Davos में आयोजित World Economic Forum के दौरान Trump ने कहा कि Greenland को लेकर बल प्रयोग नहीं किया जाएगा और भविष्य के समझौते की रूपरेखा तैयार की गई है। निवेशकों की नजर अब नवंबर के Personal Consumption Expenditures आंकड़ों और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों पर है। बाजार सहभागियों का अनुमान है कि US Federal Reserve अपनी 27 से 28 जनवरी की बैठक में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, हालांकि वर्ष के आगे के महीनों में दो बार दर कटौती की संभावना जताई जा रही है।

