बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली
डीसीएम श्रीराम फाउंडेशन, द/नज इंस्टीट्यूट के सामाजिक नवोन्मेष केंद्र और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (भारत सरकार) के कार्यालय के सहयोग से, डीसीएम श्रीराम ऐगवाटर चैलेंज के लिए मिडलाइन मूल्यांकन के परिणामों की घोषणा की। जून 2023 में शुरू की गई इस चैलेंज में 14 अग्रणी टेक्नोलॉजी को एक साथ लाया गया है, जिसका उद्देश्य है, भारत के छोटे किसानों, खासकर धान, गेहूं, गन्ना और कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए जल उपयोग दक्षता में बदलाव लाना और उत्पादकता को बढ़ावा देना।
पिछले दस महीनों में, इन टेक्नोलॉजी को भारत के कई कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लागू किया गया है, जिनका उद्देश्य है, देश की कुछ सबसे गंभीर कृषि चुनौतियों को दूर करना। द/नज प्राइज़ टीम ने एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकनकर्ता, इकोसिएट कंसल्टेंट्स के साथ साझेदारी में किए गए व्यापक मिडलाइन मूल्यांकन के तहत कठोर निर्णय प्रक्रिया के जरिये चार सफल संगठनों को चुना गया और अब वे चैलेंज के अंतिम चरण में आगे बढ़ेंगे।
चार संगठन, जो चैलेंज के अंतिम दौर में आगे बढ़ेंगे और जिन्हें 15-15 लाख रुपये का माइलस्टोन अनुदान प्रदान किया जाएगा, उनमें शामिल हैं – ईएफ पॉलिमर जिसे मिट्टी की नमी बनाए रखने वाले जैव-इनपुट में विशेषज्ञता प्राप्त है, कल्टीवेट – जो खेती में पानी के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए उन्नत परामर्श सेवाएं प्रदान करता है, इंडस्टिल – सटीक जल प्रबंधन के लिए सिंचाई प्रणालियों के स्वचालन में नवोन्मेष करता है और फायफार्म – खेती में जल दक्षता बढ़ाने के लिए स्केलेबल समाधान विकसित करता है।
अंतिम चरण के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली इन इकाइयों को कुल 60 लाख रुपये दिए जाएंगे और इनमें से हर संगठन अब छोटे किसानों के लिए सस्ती कीमतों पर जल उपयोग दक्षता और लाभप्रदता ब?ाने के लिए अपनी टेक्नोलॉजी को आगे ब?ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। चुनौती का अंतिम चरण, सितंबर 2024 से शुरू होगा और विजेता की घोषणा फरवरी 2025 में की जाएगी। सबसे प्रभावशाली और स्केलेबल नवोन्मेष को 2 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जिससे यह वहनीय कृषि हस्तक्षेपों के लिए उपलब्ध सबसे उदार अनुदानों में से एक बन जाएगा। डीसीएम श्रीराम फाउंडेशन के अध्यक्ष, अमन पन्नू ने इस चुनौती के बारे में कहा, कि डीसीएम श्रीराम ऐगवाटर चैलेंज एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य है, कृषि में पानी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना, खासकर छोटे किसानों के लिए जो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मिडलाइन मूल्यांकन ने कई उल्लेखनीय नवोन्मेष की क्षमता को उजागर किया है, जो जल संरक्षण और बेहतर उत्पादकता में महत्वपूर्ण योगदान देने का वादा करते हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया अपने आप में बहुत ही व्यवस्थित थी, जो दो महीने से अधिक समय तक चली और इसमें आठ राज्यों के फील्ड विजिट शामिल थे। इन विभिन्न फील्ड विजिट में चुनिंदा प्रौद्योगिकी का जमीनी स्तर पर मूल्यांकन किया गया और नवोन्मेष के असर तथा प्रभावशीलता के आकलन के लिए सैकड़ों किसानों का साक्षात्कार लिया गया। मैं इस समस्या को हल करने और उल्लेखनीय अनुदान से सम्मानित होने के लिए चार विजेता संगठनों को बधाई देना चाहता हूं। हम अंतिम चरण में बढ़ रहे हैं और ऐसे में इन प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर देखने और देश भर के लाखों किसानों के जीवन पर ठोस प्रभाव डालने के लिए उत्साहित हैं। द/नज प्राइज के निदेशक, कनिष्क चटर्जी ने कहा कि भारत में छोटे किसानों की खेती के बेहतर भविष्य के लिए जल का दक्षता से उपयोग के लिए नवोन्मेष करना आवश्यक है। कृषि-जल चुनौतियों का समाधान विकसित करने की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन सीमांत किसानों के लिए किफायती और सुलभ मॉडल दुर्लभ हैं। डीसीएम श्रीराम ऐगवाटर चैलेंज के मिडलाइन मूल्यांकन से पता चला है कि हमारे पास ऐसे व्यवहार्य और स्केलेबल समाधान हैं, जो किसानों की भूमि उत्पादकता से जुड़ी जटिल जल चुनौतियों, मूल्य निर्धारण तथा बाजार अस्थिरता जैसी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। चैलेंज को ऐगटेक को इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए तेजी से नवोन्मेष करने, इनका प्रदर्शन करने और समाधानों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है। ये नवोन्मेष कृषि में जल दक्षता बढ़ाकर, देश भर के 600 मिलियन से अधिक छोटे किसानों की आजीविका को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं। इस चैलेंज के निर्णायक मंडल में हेमेंद्र माथुर (भारत इनोवेशन फंड), अरुणा पोहल (आईएफएचडी), विलास शिंदे (सह्याद्री फाम्र्स) और इमैनुएल मरे (कैस्पियन) जैसी मशहूर हस्तियां शामिल थीं, जिन्होंने प्रतियोगी संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा की है। निर्णायक मंडल ने पानी के उपयोग से जुड़ी दक्षता और भारत के छोटे किसानों के बीच व्यापक रूप से अपनाने के लिए उनकी मापनीयता के लिए इन प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं का मूल्यांकन किया। डीसीएम श्रीराम फाउंडेशन बड़े पैमाने पर जल संरक्षण को सक्षम करने वाले नवोन्मेषों और प्रथाओं को बढ़ावा देकर कृषि में अव्यवस्थित जल उपयोग की यथास्थिति को चुनौती देने के लिए प्रतिबद्ध है। द/नज पुरस्कार भारत की आबादी के निचले 30 प्रतिशत हिस्से, खासकर छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका की चुनौतियों को दूर करने वाले समाधान बनाने पर केंद्रित है।

