Wednesday, July 1, 2026 |
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ईरान-इजराइल तनाव से क्रूड ऑयल सप्लाई प्रभावित, भारत में महंगाई का बढ़ा दबाव

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज / नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते Iran–Israel tensions के चलते पिछले करीब 18 दिनों से भारत में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई में अस्थिरता बनी हुई है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में करीब 3% तक उछाल दर्ज किया गया है, जिससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। हालांकि, भारत सरकार ने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की है। भारत लगातार Strait of Hormuz के माध्यम से अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए Iran से बातचीत कर रहा है।

इसी क्रम में, ईरान ने भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी जहाज—Shivalik और Nanda Devi—को अपने बंदरगाहों पर डॉकिंग की अनुमति दी है, जिससे देश की एलपीजी सप्लाई को कुछ राहत मिली है। इसके अलावा United Arab Emirates से भारतीय जहाज Jag Ladki 80,000 टन से अधिक कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है। विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण भारत सहित एशियाई अर्थव्यवस्थाएं इस तरह के भू-राजनीतिक संकटों के प्रति संवेदनशील बनी रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 92–100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे आने वाले समय में ईंधन महंगाई बढ़ने की आशंका है।

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, और Iran से जुड़े हालिया तनाव के कारण Strait of Hormuz में टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारत ने वैकल्पिक मार्गों के जरिए 70% से अधिक आपूर्ति बनाए रखी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास लगभग 20–25 दिनों का आपातकालीन तेल भंडार उपलब्ध है, जो अल्पकालिक संकट से निपटने में मदद करता है। हालांकि, वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि घरेलू गैस सप्लाई पर भी हल्का असर देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति में स्थिरता पूरी तरह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगी। यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन में व्यवधान बने रह सकते हैं। इस बीच, भारत सरकार Russia समेत अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके। हालांकि, दीर्घकालिक स्थिरता के लिए क्षेत्र में शांति बहाल होना आवश्यक माना जा रहा है।



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