New Delhi,
केंद्र सरकार ने कंपनियों से जुड़े नियमों में सुधार और प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह Companies (Incorporation) Rules, 2014 की समीक्षा और Companies Act, 2013 के तहत filing framework को सरल करने के लिए आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित कर रही है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने जानकारी दी कि इस संबंध में Companies (Incorporation) Amendment Rules, 2026 का draft तैयार किया गया है। यह draft April 8 को जारी सार्वजनिक सूचना के माध्यम से सामने लाया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह प्रस्तावित अधिसूचना उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है, ताकि सभी हितधारक इसे देख सकें और अपने सुझाव दे सकें। इच्छुक लोग May 9, 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियां जमा कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट पर उपलब्ध e-Consultation Module का उपयोग किया जा सकता है। सरकार केवल नियमों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनियों के पूरे कामकाजी ढांचे को अधिक सरल और प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दे रही है। इस दिशा में भारतीय कॉरपोरेट मामलों का संस्थान (IICA) के माध्यम से stakeholders से सुझाव लिए जा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि इस प्रक्रिया में कंपनी के पूरे lifecycle को ध्यान में रखा गया है, जिसमें entry, operations और exit जैसे तीन प्रमुख चरण शामिल हैं। इस विषय पर तैयार concept note भी वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस पर सुझाव देने की अंतिम तिथि May 15, 2026 तय की गई है।
कानूनी सुधार की दिशा में अगला कदम
पिछले महीने Lok Sabha ने Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026 को आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की मंजूरी दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक को सदन में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य Limited Liability Partnership Act, 2008 और Companies Act, 2013 में संशोधन करना है। इसके तहत छोटे-छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने, कुछ आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंड में बदलने और छोटे व्यवसायों तथा स्टार्टअप के लिए अनुपालन का बोझ कम करने का प्रस्ताव है। वित्त मंत्री ने बताया कि इस विधेयक को लाने से पहले करीब दो वर्षों तक विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसमें उद्योग संगठनों, पेशेवर संस्थानों, कानूनी और लेखा विशेषज्ञों के साथ-साथ आम जनता की राय भी शामिल की गई। सरकार का यह कदम ease of doing business को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए प्रस्तावों से खासतौर पर छोटे उद्योग, स्टार्टअप और किसानों द्वारा स्थापित उत्पादक कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

