बिजनेस रेमेडीज/मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बन गया है। पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे व्यापार और बंदरगाह अवसंरचना को मज़बूती मिली है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव, व्यापारिक अवरोधों और बदलती आपूर्ति शृंखलाओं के बीच भारत रणनीतिक स्वायत्तता, शांति और समावेशी विकास का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “जब दुनिया के समुद्र उथल-पुथल में हों, तब विश्व एक स्थिर प्रकाशस्तंभ की तलाश करता है। भारत उस भूमिका को मज़बूती और स्थिरता के साथ निभाने के लिए तैयार है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने निवेशकों से भारत के समुद्री क्षेत्र में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में काम करने और विस्तार करने का सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि नौवहन क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है और करोड़ों रुपये के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
मोदी ने कहा कि यह विश्व के भारत की समुद्री क्षमताओं पर भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “आपकी उपस्थिति हमारे साझा संकल्प को दर्शाती है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत का समुद्री क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2025 भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक रहा है। आज भारत के बंदरगाह विकासशील देशों में सबसे कुशल माने जाते हैं और कई मामलों में विकसित देशों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश ने सौ साल से पुराने औपनिवेशिक नौवहन कानूनों को खत्म कर आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कानून लागू किए हैं।
उन्होंने कहा कि नए कानून राज्य समुद्री बोर्डों को सशक्त बनाते हैं, सुरक्षा और स्थिरता पर जोर देते हैं और बंदरगाह प्रबंधन में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस वर्ष भारत का पहला डीप-वाटर अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब, विजिनजम पोर्ट, शुरू हुआ है। इसके साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज यहां पहुंचा, जिससे भारत की वैश्विक क्षमता का परिचय हुआ। वर्ष 2024-25 में देश के प्रमुख बंदरगाहों ने रिकॉर्ड तोड़ कार्गो हैंडलिंग की है। उन्होंने कहा कि कांडला पोर्ट ने देश की पहली मेगावॉट-स्तरीय स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन सुविधा शुरू करके इतिहास रचा है।
भारत अब जहाज निर्माण क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है और बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्ति का दर्जा दिया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारतीय नाविकों की संख्या 1.25 लाख से बढक़र 3 लाख से अधिक हो गई है। आज भारत दुनिया में नाविकों की संख्या के मामले में शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि “मैरिटाइम इंडिया विजऩ” के तहत 150 से अधिक पहलें शुरू की गई हैं, जिनसे समुद्री क्षेत्र में व्यापक सुधार हुआ है। भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है और संचालन का समय काफी घटा है।
मोदी ने कहा कि कू्रज पर्यटन को भी नई गति मिली है और देश के आंतरिक जलमार्गों में 700 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। सक्रिय जलमार्गों की संख्या तीन से बढक़र अब 32 हो गई है। पिछले दशक में बंदरगाहों का वार्षिक अधिशेष नौ गुना तक बढ़ गया है।

