बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) में किए गए बदलावों से रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग लाभान्वित होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में अचल संपत्तियों के मामले में लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर की दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत करने की घोषणा की।
हालांकि, इसके साथ ‘इंडेक्सेशन लाभ’ (निवेश मूल्य पर मुद्रास्फीति के प्रभाव का आकलन) को हटा दिया गया है। ऐसे में अब इस बजट प्रस्ताव को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि अपनी संपत्ति बेचने वाले व्यक्तिको अधिक पूंजीगत लाभ कर चुकाना होगा। इस संबंध में राजस्व सचिव ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी हद तक चीजों को सरल बनाने की पहल है। कुछ लोगों ने इंडेक्सेशन हटाने पर आशंका जताई है। मैं उनकी चिंताओं को दूर करना चाहता हूं।’’ मल्होत्रा ने कहा, ‘‘इंडेक्सेशन प्रावधान हटाने के साथ ही पूंजीगत लाभ कर की दरों को 20 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे लंबी अवधि में रियल एस्टेट में निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों को फायदा होगा क्योंकि इस निवेश पर मुनाफे की दर 10-11 प्रतिशत से अधिक है।’’ उन्होंने कहा कि इसमें निवेशकों को रोलओवर लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप संपत्ति की बिक्री से मिली रकम को दोबारा घर खरीदने में निवेश कर रहे हैं तो एक करोड़ रुपये तक के पूंजीगत लाभ पर कोई कर नहीं लगेगा।’’ बजट में किए गए संशोधनों के मुताबिक, सरकार ने वर्ष 2001 से पहले खरीदी गई या विरासत में मिली संपत्तियों पर करदाताओं के लिए इंडेक्सेशन लाभ को बरकरार रखा गया है। कर दर में बदलाव 23 जुलाई, 2024 से प्रभावी हो गए हैं।

