4,371 करोड़ रुपये होंगे खर्च, वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी योजना
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
देश के सांख्यिकीय ढांचे को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च (विस्तार)’ योजना को मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होने वाली इस योजना पर 4,371.10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य देश में आधुनिक, गतिशील, वास्तविक समय पर आंकड़े उपलब्ध कराने वाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुकूल सांख्यिकीय व्यवस्था विकसित करना है।
योजना और बजट: विस्तार योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके लिए कुल 4,371.10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। योजना के माध्यम से देश की आधिकारिक सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने और आंकड़ों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता में सुधार करने पर जोर दिया जाएगा।
तीन प्रमुख घटक: योजना में व्यापक सांख्यिकीय संचालन एवं व्यवस्था को मजबूत बनाना, सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता और आर्थिक जनगणना को शामिल किया गया है। इन तीनों घटकों के माध्यम से सर्वेक्षण, अनुसंधान, डिजिटल बदलाव और आंकड़ों के प्रबंधन को बेहतर बनाया जाएगा।
59 नए सर्वेक्षण और एआई का उपयोग: योजना के तहत 16वें वित्त आयोग चक्र में 59 सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव है, जबकि पहले 43 प्रमुख सर्वेक्षण किए गए थे। इसके साथ ही सांख्यिकीय प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाएगा और आंकड़ों के संग्रह, जांच एवं विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ाया जाएगा। सेवाओं के उत्पादन और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों से जुड़े नए सूचकांक भी जारी किए जाएंगे।
राज्यों को मिलेगी आर्थिक सहायता: सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण सहायता योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी सांख्यिकीय क्षमताएं मजबूत बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए परिणाम आधारित नए ढांचे एसएसएस 2.0 को लागू किया जाएगा, जिससे राज्यों में आंकड़ों के संग्रह और प्रबंधन की व्यवस्था बेहतर होगी।
8वीं आर्थिक जनगणना: सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 8वीं आर्थिक जनगणना कराएगी। इसके तहत ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक गैर-कृषि प्रतिष्ठानों तथा उनमें काम करने वाले कर्मचारियों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाएगा। इससे असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, इस आंकड़े के आधार पर सकल घरेलू उत्पाद में असंगठित क्षेत्र के योगदान का आकलन भी किया जा सकेगा।

